
मथुरा में यमुना की शांत लहरें अचानक काल बन गईं। पंजाब से बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं के लिए यह सफर जिंदगी का सबसे भयानक मंजर साबित हुआ। जब चीख-पुकार मची और स्टीमर पलटा तो किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। अपनों को आंखों के सामने डूबते देख किनारे पर खड़ी महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। वृंदावन की गलियों में गूंजने वाले जयकारे अब सिसकियों में तब्दील हो चुके हैं।
पंजाब के श्रद्धालुओं का जत्था यमुना में घूमने के लिए दोपहर में मोटर बोट पर सवार हुआ था। इस दौरान आसमान में धूल भरी आंधी चलने लगी और यमुना के पानी में हलचल बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि पानी में हिलोरे मारता स्टीमर अनियंत्रित हो गया और पीपा पुल से टकर गया। टकराते ही स्टीमर का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गया। देखते ही देखते पंजाब के जगराओं से आए हंसते-खेलते परिवारों के करीब 30 लोग गहरे पानी की आगोश में समा गए।
हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय गोताखोर गुलाब अपने साथियों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। गुलाब ने बताया कि जब वह पहुंचे तो चारों तरफ चीख-पुकार मची थी। करीब 50 गोताखोरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी। अब तक 15 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। घायलों को रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौके पर डीआईजी शैलेश पांडे और डीएम चंद्र प्रकाश सिंह भारी पुलिस बल के साथ डटे हुए हैं।
पंजाब के लुधियाना से आए जत्थे में शामिल महिला ने कांपती आवाज में बताया कि हम लोग बस से बड़ी श्रद्धा के साथ यहां आए थे। स्टीमर में सब ठीक चल रहा था लेकिन अचानक तेज हवा के झोंके ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। स्टीमर जैसे ही पीपा पुल से टकराया, वह पलट गया। लहरों के बीच अपनों को डूबते देखना रूह कंपा देने वाला था।
मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि अब तक 17 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं। यमुना की गहराई में डूबे लोगों को तलाशने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। अंधेरा बढ़ने के साथ ही चुनौतियां भी बढ़ रही हैं लेकिन प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।
यमुना किनारे इस वक्त हजारों की भीड़ जमा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा न आए इसके लिए पुलिस लगातार लोगों को पीछे हटा रही है। पंजाब से आए 120 लोगों के उस ग्रुप में अब सन्नाटा पसरा है, जो सुबह तक भक्ति के रंग में सराबोर था। एक महिला बदहवास होकर सिर्फ इतना ही कह पा रही थी कि सब खत्म हो गया। यमुना का किनारा इस वक्त रेस्क्यू की लाइटों से तो जगमगा रहा है, लेकिन कई घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए हैं।
Updated on:
10 Apr 2026 06:57 pm
Published on:
10 Apr 2026 06:01 pm
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