
मथुरा। उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली को सुधारने के भले ही लाख दावे किया जाते रहे हों लेकिन पुलिस है कि सुधरती ही नहीं। ऐसा ही कारनामा मथुरा पुलिस ने किया है जहां ज़बरन बेगुनाह को हिरासत में ले लिया और उसके खरीदे हुए दो ट्रैक्टरों का उसी पर चोरी का इल्जाम लगाकर ले आई। पीड़ित ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जिसके बाद आरोपी इंस्पेक्टर और उसके सहियोगियों के ख़िलाफ़ न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
ये है मामला
सरकारें कोई भी हो लेकिन पीड़ित को इंसाफ़ शायद किताबों और कहानियों में ही मिलता है असल जिंदगी में तो उसे सिर्फ़ धक्के ही मिलते हैं और अगर जुर्म पुलिस ने किया हो तो इंसाफ़ मिलने की उम्मीद भी करना शायद बेईमानी होगा। मथुरा में पुलिस की खुली लूट का सबूत मिलने के बावजूद भी विभाग आंखें मूेंदे रखा। मामला तब का है जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार हुआ करती थी। घटना दोफरवरी 2017 की है जिसे अंजाम किसी और ने नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के इंसपेक्टर उदयप्रताप ने वर्दी के रोब में दिया। दरअसल मामला पुलिस की छापे मार कार्रवाई से जुड़ा है। उदय प्रताप दो फ़रवरी 2017 को थाना बरसाना इलाके के गांव भरना कला में देवकी के घर रात्रि के समय अचानक पहुंचे और ट्रैक्टर चोरी के आरोप में दो लोगों को हिरासत में ले आए। बरामदगी के तौर पर दो ट्रैक्टर और ट्रॉली व एक लाख रुपए लेकर थाने पहुंचे। लेकिन जिन ट्रैक्टर को उत्तर प्रदेश के काबिल पुलिस इंस्पेक्टर वहां से बरामद किया वो उन्हीं लोगों के थे जिन्हें पुलिस हिरासत में लेकर आई थी। उन लोगों के लाख समझाने के बाद भी पुलिस ने एक न सुनी और उन्हें छोड़ने के एवज़ में लाखों रुपए की डिमांड कर डाली। जैसे तैसे हिरासत में लिए लोगों को पुलिस ने छोड़ दिया लेकिन उनके टैक्टर को पुलिस ने नहीं छोड़ा। पीड़ित ने उसी वक्त आला अधिकारियों के यहां गुहार लगाई तो कोतवाल साहब ने उन दोनों ट्रेक्टरों को रातों रात गायब करा दिया और मामले में पेच फंसता देख पीड़ित को धमकी देना शुरू कर दिया। इस दौरान पीड़ित ने मथुरा से लेकर लखनऊ के आला अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई लेकिन न तो पीड़ित को सपा सरकार में न्याय मिल न ही योगी सरकार के अधिकारियों ने ही उसकी सुनी। हार थक कर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। साक्ष्य के आधार पर न्ययालय ने आरोपी इंस्पेक्टर के ख़िलाफ़ एक फरवरी 2018 को मुकदमा दर्ज करने के आदेश कर दिए लेकिन पुलिस तो पुलिस है आख़िर अपने साथी पुलिसकर्मी के ख़िलाफ़ कैसे मुकदमा दर्ज करती। पीड़ित ने हिम्मत नहीं हारी वो न्यायालय के आदेश की कॉपी लेकर एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के यहां चक्कर लगाता रहा और फिर न्यायालय के आदेश पर आईजी आगरा रेंज द्वारा कोर्ट के आदेश के करीब 45 दिन बाद दोषी इंस्पेक्टर उदय प्रताप के और अन्य 10 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया गया लेकिन इसमें भी जिन धाराओं में न्यायालय ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिया उन धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
केस वापस लेने के लिए बनाया जा रहा दबाव
घटना को करीब डेढ़ साल बीत गया लेकिन अभी तक पीड़ित को न्याय नहीं मिला है। पीड़ित पक्ष ने अभी भी हार नहीं मानी है। पीड़ित एक बार फिर पुलिसकर्मियों को सजा दिलवाने के लिए एसएसपी मथुरा के पास पहुंचा और उनसे न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उदर प्रताप ने न सिर्फ उनके घर में घुस कर मारपीट की है बल्कि घर की महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें भी कीं और घर में रखे एक लाख रुपए भी निकाल कर ले गए। उन पर लगातार मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आए दिन कोई न कोई धमकी उन्हें दी जा रही है। जब इस मामले में मथुरा एसपी देहात आदित्य शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आरोपी उदय प्रताप इस वक्त लखनऊ में तैनात हैं।
Published on:
15 Apr 2018 05:21 pm
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