
Holi 2022 : रमणरेती आश्रम में फूलों संग उड़ा अबीर गुलाल, फूलों से होली खेलते भगवान।
Holi 2022 : ब्रज में होली (Braj Ki Holi) का एक अलग ही महत्व है। कान्हा की नगरी में 40 दिवसीय रंगोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को रमणरेती आश्रम (Ramanreti Ashram) में होली का आयोजन किया गया। भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी स्वरूपों ने भक्तों के संग फूल होली के साथ गुलाल और लड्डू होली खेली। उड़त गुलाल, लाल भए बदरा के साथ पूरे रमणरेती आश्रम के प्रांगण में हजारों श्रद्धालु भगवान के रंग में रंगे नजर आए। देश भर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस दौरान जमकर ब्रज की होली का लुत्फ उठाया। नजारा देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे हर कोई भगवान के रंग में रंगने को आतुर है। बच्चे, जवान और बुजुर्गों से लेकर महिलाएं तक होली खेलती नजर आईं।
ब्रज में अब होली का खुमार चढ़ने लगा है। रविवार को रमणरेती आश्रम स्थित प्रांगण में होली का आयोजन किया गया। देश के कोने कोने से होली के इस उत्सव में भाग लेने के लिए आए भक्त जमकर भजनों पर थिरकते नजर आए। पूरा वातावरण रंगमय हो गया। जिधर देखो उधर ही होली की धूम मची थी। होली खेलने आए भक्त भगवान स्वरूप पात्रों के साथ होली खेल कर अपने आपको धन्य मान रहे थे। वहीं भगवान श्री कृष्ण ने फूलों की होली के साथ-साथ लड्डू होली, लठमार होली और गुलाल होली का लुफ्त अपने भक्तों के साथ उठाया। हजारों श्रद्धालुओं के ऊपर जैसे ही गुलाल उड़ा तो भक्त भगवान की भक्ति में डूबे नजर आए। क्या बच्चा क्या बुजुर्ग और क्या युवा हर कोई भगवान की भक्ति में रंग कर राधा-कृष्ण स्वरूपों के साथ होली का आनंद ले रहा था।
अलौकिक है ब्रज की होली
रमन रेती आश्रम में होली का लुफ्त उठाने आए श्रद्धालुओं से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि यहां एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां जिस तरह से होली खेली गई है, वह अपने आप में अद्भुत है। भगवान के साथ होली खेलने का अवसर हर किसी को नहीं मिलता। हम सौभाग्यशाली हैं कि भगवान ने अपने दर पर हमें होली खेलने के लिए बुलाया और आज हम अपने आपको धन्य मान रहे हैं, जो भगवान के साथ हमने लड्डू से फूलों से और गुलाल से होली खेली।
पहली बार होली खेलने पहुंची महिलाएं हुई मंत्रमुग्ध
दिल्ली से आई महिला श्रद्धालुओं ने कहा कि हम पहली बार यहां होली खेलने के लिए आए हैं। ब्रज की होली के बारे में बहुत सुना था और आज देख भी लिया। यहां आकर हम अपने आप को धन्य मानते हैं। जिस तरह से यहां होली खेली गई हमारे यहां उस तरह की होली नहीं होती है।
Published on:
06 Mar 2022 05:12 pm
