23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Holi 2022 : टेसू के फूलों से बने खास रंगों से भक्तों संग होली खेलेंगे बांके बिहारी और राधा रानी, जानें कैसे बनते हैं ये रंग

Holi 2022 : मथुरा में बरसाना स्थित लाडली मंदिर और वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर समेत पूरे ब्रज में होली की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। इस बार भी सभी मंदिरों में टेसू के फूलों को मध्यप्रदेश और हाथरस से मंगाया गया है, जिससे होली का रंग तैयार किया जा रहा है। इस रंग के इस्तेमाल से शरीर की त्वचा को भी कोई हानि नहीं पहुंचती है।

3 min read
Google source verification

मथुरा

image

lokesh verma

Mar 04, 2022

how-to-make-natural-colors-by-tessu-flowers-holi-2022.jpg

Holi 2022 : टेसू के फूलों से बने खास रंगों से भक्तों संग होली खेलेंगे बांके बिहारी और राधा रानी, जानें कैसे बनते हैं ये रंग।

Holi 2022 : ब्रज की होली देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पूरे 40 दिन चलने वाले होली के उत्सव को मनाने के लिए देश के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कान्हा की नगरी में पहुंचते हैं। होली का पहनावा हो या फिर खानपान यहां सब कुछ अलग होता है। इसके साथ ही यहां रंग से होली खेले जाने का तरीका भी अलग ही होता है। होली के त्योहार के लिए इस बार भी ब्रज के मंदिरों में बड़ी मात्रा में टेसू के फूलों से रंग तैयार किया जा रहा है। इसी रंग से भगवान अपने भक्तों के साथ होली खेलेंगे। इस प्राकृतिक रंग से किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता है। होली का रंग बनाने के लिए मध्यप्रदेश से बड़ी मात्रा में टेसी के फूल मथुरा नगरी पहुंच चुके हैं। आइये जानते हैं कि कैसे तैयार होता है टेसू के फूल से प्राकृतिक रंग।

बरसाना स्थित लाडली मंदिर और वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर समेत पूरे ब्रज में होली की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। इस बार भी सभी मंदिरों में टेसू के फूलों को मध्यप्रदेश और हाथरस से मंगाया गया है, जिससे होली का रंग तैयार किया जा रहा है। होली पर यूं तो बाजारों में अलग-अलग तरह के रंग उपलब्ध हैं। लेकिन, ब्रज के मंदिरों में परम्परागत रंगों का ही प्रयोग किया जाता है। यहां होली से कई दिन पहले से मंदिरों में प्रकृति से मिले फूलों से रंग को तैयार किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- Holi 2022 : गुम हो जाएगी बनारस की मशहूर पीतल की पिचकारी

मध्यप्रदेश के साथ हाथरस से मंगाए गए टेसू के फूल

बता दें कि पलाश के पेड़ों पर आने वाले टेसू के फूल बहुत ही आर्कषक और गुणकारी होते हैं। वैसेे तो देशभर में टेसू के फूलों को होली के रंग छुड़ाने के लिए जाना जाता है, लेकिन मथुरा में इससे रंंग बनाया जाता है। पलाश के पेड़ों पर टेसू के फूल बसन्त ऋतु में ही खिलते हैं। पलाश के पेड़ तीन प्रकार के होते हैं। जिनपर अलग-अलग रंगों सफेद, पीले और नारंगी रंग के टेसू के फूल खिलते हैं। पलाश प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश के मुरैना, शिवपुरी और भिंड में पाया जाता है। इसके साथ ही यूपी के हाथरस में पलाश के पेड़ पाए जाते हैं। होली से पहले इन्हीं स्थानों से हर साल ब्रज में टेसू के फूल लाए जाते हैं।

कहां कितने टेसू के फूल मंगाए गए

बरसाना के राधा रानी मंदिर के संजय गोस्वामी ने होली की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार हाथरस से टेसू के फूल मंगाए गए हैं। प्राकृतिक फूलों से रंग बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस बार राधा रानी मंदिर में 2 कुंतल 20 किलो टेसू के फूल मंगाए गए हैं तो नंदगांव में करीब दो कुंतल मंगाए गए हैं। इसी तरह द्वारिकाधीश मंदिर में 5 कुंतल, बांके बिहारी मंदिर में दो कुंतल, रमणरेती मंदिर में 4 कुंतल टेसू के फूल मंगाए गए हैं। इसी तरह ब्रज के सभी मंदिरों में बड़ी मात्रा में टेसू के फूल मंगाए गए हैं।

यह भी पढ़ें- पवित्र तीर्थ मथुरा वृंदावन में मांसाहार को लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, होटल और रेस्त्रां का लाइसेंस होगा निरस्त

इस तरह टेसू के फूलों से बनता है प्राकृतिक रंग

संजय गोस्वामी ने बताया कि टेसू के फूलों को सबसे पहले गर्म पानी में डाला जाता है। इसके बाद इनमें सफेदी डालकर लगातार पानी को गर्म करते हुए चलाया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद फूल अपना रंग छोड़ देते हैं। इसके बाद इसमें खुशबू के लिए केसर, गुलाब जल, या फिर इत्र का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि ब्रज के सभी मंदिरों में टेसू के फूलों से रंग बनाया जाता है।

By - Nirmal Rajpoot