
lathmar holi 2018
मथुरा। रंगों का त्योहार होली बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। मथुरा और बरसाने की होली प्रसिद्ध भी है और खास भी। यहां वर्षों से लठ्ठमार होली की परंपरा चली आ रही है। इस होली को देखने और इसका हिस्सा बनने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। ये परंपरा क्यों शुरू हुई, क्यों ब्रज में लट्ठमार होली होली खेली जाती है, ये बड़े सवाल है। पत्रिका टीम ने बरसाने के लोगों से बात की, तो उन्होंने बताया कि ये परंपरा क्यों शुरू हुई और लठ्ठमार होली खेलने का उद्देश्य आखिर क्या है।
इसलिए शुरू हुई ये परंपरा
ब्रज के लोगों ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण महिलाओं का सम्मान करते थे। किसी भी मुसीबत या परेशानी में हमेशा उनकी मदद के लिए दौड़े चले आते थे। लठ्ठमार होली में श्रीकृष्ण के उसी संदेश को प्रदर्शित किया जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ राधा से होली खेलने के लिए बरसाना आया करते थे, लेकिन राधा जी अपनी सहेलियों के साथ बांस की लाठियों से उन्हें दौड़ाती थीं। तभी से ये परंपरा शुरू हुई। अब लठ्ठमार होली बरसाना की परंपरा बन चुकी है। ब्रजवासी हर साल इस त्योहार को पूरे जोश के साथ मनाते हैं।
नन्द गांव के लोग बरसाने में आते हैं होली खेलने
ब्रजवासियों का मानना है कि लट्ठमार होली केवल आनंद के लिए ही नहीं बल्कि यह नारी सशक्तीकरण का भी प्रतीक मानी जाती है। तभी से लठ्ठमार होली की परंपरा को मनाने में ब्रजवासी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। थोड़े से चुलबुले अंदाज में महिलाएं लठ्ठमार होली में अपनी ताकत का प्रदर्शन करती हैं। नन्दगांव के लोग बरसाना में होली खेलने आते हैं। होली खेलने के लिए वे आकर गोपियों को ललकारते हैं। गोपियां लाठी लेकर आती हैं। पहले से तैयार गोपी बचाव के लिए ढाल अपने साथ लाते हैं। जब गोपियां सिर पर लट्ठ से वार करती हैं तो नन्दगांव के लोग ढाल से रोक लेते हैं।
Updated on:
24 Feb 2018 02:38 pm
Published on:
24 Feb 2018 02:36 pm
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