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प्रधानमंत्री क्रिकेट और सिनेमाजगत के लोगों ये अवार्ड नहीं देना चाहते, मोहन स्वरूप भाटिया ने खोला राज, देखें वीडियो

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने राज की बातें बताईं

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Padma Shri Mohan swarup bhatiya

Padma Shri Mohan swarup bhatiya

मथुरा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया गया। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के बारे में वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया से बात की। जब उनके विचार जानने चाहे तो उन्होंने इशारों ही इशारों में बहुत कुछ कह दिया। उन्होंने कहा कि आज का समय पत्रकारिता का नहीं, बिजनेस और विज्ञापन का है। उस समय की पत्रकारिता और आज की पत्रकारिता में अगर देखा जाए तो जमीन आसमान का फर्क है।

पत्रकारिता दिवस की बधाई
हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। आज ही के दिन जुगल किशोर शुक्ल ने दुनिया का पहला हिन्दी साप्ताहिक पत्र "उदन्त मार्तण्ड" का प्रकाशन कलकत्ता से शुरू किया था। इस दिन को पत्रकारिता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस प्रकार भारत में हिन्दी पत्रकारिता की आधारशिला पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने डाली थी। उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन 30 मई, 1826 को कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था। यह पत्र हर मंगलवार को प्रकाशित होता था। उस समय की बात करें तो अंग्रेज़ी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे किन्तु हिन्दी में एक भी पत्र प्रकाशित नहीं होता था। पद्मश्री और वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस की सभी को बधाई दी और समाज हित में कार्य करने की पत्रकारों से अपील की।

आज के दौर की पत्रकारिता पर चिन्तित
हिन्दी पत्रकारिता दिवस के मौके पर पद्मश्री और वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया ने पत्रिका से खास बातचीत करते हुए बताया कि जब हमने पत्रकारिता में कदम रखा था, तब किस समय और आज के समय में बहुत बदलाव नजर आया है, उस समय जो पत्रकारों का समय था वह काफी चुनौतीपूर्ण हुआ करता था। उनका कहना था कि तब आत्मा में बल और नैतिकता हुआ करती थी । आज के समय में पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ विज्ञापन की मांग रहे गई है । उस समय में सच को सामने लाना ही पत्रकारिता थी लेकिन आज के समय में ऐसा कुछ नहीं रह गया है। इस बात को लेकर वह काफी चिंतित भी नजर आए।

महत्वपूर्ण समाचार को टेलीफोन से बताया जाता था
पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया का यह भी कहना था अगर कोई समाचार बहुत ही महत्वपूर्ण होता था तो उसे हम लोग टेलीफोन से फोन करके बताते थे। उस समय फोन करने और सुनने का भी पैसा लगता था। उसके बाद जो युग आया समाचार को भेजने का वह फैक्स से समाचार ऑफिस भेजा करते थे।

सिफारिश पर पद्म सम्मान नहीं दिए जाएं
उन्होंने कहा कि जब मुझे पद्मश्री से नवाजा गया तो कुछ समय मुझे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करने का समय मिला। उन्होंने चलती हुई बात पर कहा कि मैं यह चाहता हूं कि जिसे भी सम्मान मिले वह बिना सिफारिश के मिले। उनका यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि फिल्म जगत के लोगों को और क्रिकेट से जुड़े लोगों को यह सम्मान ना दिया जाए. क्योंकि यह लोग समाज हित के लिए कुछ नहीं करते।

1956 में रखा पत्रिकारिता में कदम
उन्होंने अपने बारे में बताते हुए कहा कि मेरा जन्म 9 जून 1935 को मथुरा में हुआ और शिक्षा पूरी करने के बाद 1956 में मैंने पत्रकारिता में कदम रखा । कई मल्हारे लिखीं। गीत लिखे। बृज की संस्कृति के बारे में भी लिखा है ।