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रिएलिटी चेक: हर रोज जान हथेली पर लेकर घर से निकलते हैं बच्चे, धड़ल्ले से उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां

  अगर आपके बच्चे भी स्कूल वाहन से जाते हैं स्कूल तो जरूर पढ़ें ये खबर। पत्रिका ने स्कूल वैन को लेकर रिएलिटी चेक किया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आयी।

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School Van

School Van

मथुरा। अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण अक्सर माता पिता स्कूल में बच्चों के दाखिले के बाद उनके आने जाने की जिम्मेदारी स्कूलों पर छोड़ देते हैं। इसके लिए वे स्कूल में अतिरिक्त फीस भरकर बच्चों के स्कूल आने जाने के लिए वहां के वाहन की सुविधा लेते हैं। लेकिन क्या उन्हें ये पता है कि ऐसा करके वे अपने बच्चों को हर दिन मौत के मुंह में ढकेल रहे हैं? अगर नहीं तो अब भी समय है, सजग हो जाइए। हाल ही पत्रिका ने इसको लेकर रिएलिटी चेक किया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आयी। स्कूल की वैन, मैजिक और बसों में क्षमता से दोगुने और तिगुने बच्चों को बैठाकर रोजाना धड़ल्ले ले जाया जाता है। स्कूल बस या वैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित नियमों की पूरी तरह अनदेखी की जाती है। इस तरह की लापरवाही के कारण यूपी ही नहीं बल्कि देश के तमाम शहरों में कई हादसे हो चुके हैं, इसके बावजूद स्कूल संचालकों पर कोई असर नहीं होता।

रिएलिटी चेक के दौरान पत्रिका की टीम ने सबसे पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्कूल वैन का हाल जाना। ये वैन पूरी तरह खटारा थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र तो दूर, देखभाल के लिए कोई अटेंडेंट भी नहीं था। ड्राइवर के मुताबि गाड़ी में आठ सवारियां बैठाने का पास था, लेकिन वैन में कुल 22 बच्चे बैठे थे जो क्षमता से लगभग तीन गुना थे। तीन बच्चे तो सिर्फ आगे ड्राइवर के बगल वाली सीट पर थे।

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कुछ ऐसा ही नजारा एलाइट न्यू जनरेशन स्कूल, कान्हा माखन पब्लिक स्कूल, रूमैक्स इंटरनेशनल स्कूल में भी देखने को मिला। इन स्कूलों की वैन में भी दोगुनी संख्या में छात्र-छात्राएं बैठे पाए गए। कान्हा माखन पब्लिक स्कूल की मैजिक वैन में मौके पर तकरीबन 15 बच्चे बैठे मिले जबकि 10 सवारी पास आउट है। जब उससे इस बारे में सवाल किया गया तो ड्राइवर का कहना था कि स्कूल से 15 बच्चे दिए जाते हैं।

ये बोले जिलाधिकारी
इस बारे में जब जिलाधिकारी मथुरा सर्वज्ञ राम मिश्र से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी नया सत्र शुरू हुआ है। इस संबन्ध में बेसिक शिक्षा अधिकारी, ट्रांसपोर्ट और पुलिस के साथ बैठकर हमने विद्यालय खुलने से पहले भी बैठक की थी और अब भी कर रहे हैं। वैन ही नहीं बल्कि जितने वाहन हैं, उन सभी में मानक के अनुसार ही बच्चे बैठाने के लिए पहले उनको कहा जाएगा, अगर फिर भी ऐसा करते पाए गए तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

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ये हैं नियम
सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइंस के मुताबिक स्कूल बस व वैन आदि तमाम वाहनों के लिए कुछ नियम हैं, जो इस प्रकार हैं।

- वाहन के आगे और पीछे 'स्कूल बस' लिखा हो
- स्कूल बस में स्पीड गवर्नर्स लगा हो और स्पीड लिमिट 40 किलोमीटर से ज्यादा न हो।
- 12 साल से ज्यादा की उम्र वाले बच्चों को एक व्यक्ति के तौर पर गिना जाना चाहिए।
- बस के पीछे स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर साफ-साफ लिखा हो।
- भाड़े वाली बसों पर 'स्कूल ड्यूटी' लिखा होना जरूरी है।
- स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए।
- बस पर देखभाल करने वाला एक अटेंडेंट होना जरूरी है।
- स्कूल बस या वैन में क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बिठा सकते।
- फर्स्ट एड बॉक्स अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए।
- बस में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बसों की खिड़की में लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
- बस के दरवाजे मजबूत हों और अच्छी तरह से बंद होने वाले हों।
- स्कूल बैग्स को सुरक्षित रखने के लिए बस की सीटों के नीचे जगह होनी चाहिए।

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