ब्रजमंडल के नन्दबाबा यशोदा मैया के घर जब कन्हैया का लालन पालन हो रहा था, सम्पूर्ण ब्रजभूमि में आनन्द और उल्लास का वातावरण था सभी देवी, देवता, यक्ष, किन्नर नाना प्रकार के भेष रखकर अपने इष्ट के बाल स्वरूप के दर्शनों के लिये नन्दभवन में आ रहे थे। इसी क्रम में भगवान भोले नाथ भी बालकृष्ण प्रभु के दर्शन करने नन्दगांव में आये है। औघड़नाथ के भेष में शंकर जी नन्दभवन गये। मैया यशोदा से लाला के दर्शन करवाने को विनती की मैया ने दर्शन नही करवाये। शंकर जी ने लाख प्रयत्न किये पर माता यशोदा ने साफ कह दिया कि साँप बिच्छू आदि आपके लटक रहे है जब मुझे ही डर लग रहा है तो मेरा नन्हा सा बालक जरुर डर जायेगा। हार कर शंकर जी नन्दभवन से एक कोस दूर जंगल में कृष्ण दर्शन की आशा से धूनी रमा कर बैठ गये ।