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पांच राज्यों की सर्वोच्च अदालत, महज तीन तारीख में होता है फैसला, न मानने वाले को दी जाती है ये कठोर सजा

जिला मुख्यालय से करीब 60 किलो मीटर दूर छाता तहसील के चौमुंहा ब्लॉक के बुजुर्ग बसई गांव में सेपरों की अदालत लगती है।

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Snake charming society Court

Snake charming society Court

मथुरा। जिला मुख्यालय से करीब 60 किलो मीटर दूर छाता तहसील के चौमुंहा ब्लॉक के बुजुर्ग बसई गांव में सेपरों की अदालत लगती है। इस अदालत की खास बात ये है कि यहां महज तीन तारीख में फैसला हो जाता है। समाज की इस अदालत को ‘सर्वोच्च अदालत‘ की स्थिति का दर्जा हासिल है। समाज के किसी भी बड़े से बड़े मामले को यहां 3 तारीखों में सुनवाई के बाद फैसला सुना दिया जाता है। मध्य प्रदेश (एमपी), हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और यूपी के साथ देश के अन्य क्षेत्रों से भी सपेरे समाज के लोगों के विवाद यहां सुनवाई के लिए आते हैं।

समाज में पंचों का फैसला सर्वोपरि
छाता तहसील के चौमुंहा ब्लॉक का बुजुर्ग बसई गांव ठाकुर बाहुल्य है। इस गांव में ही एक तरफ नगला सपेरा है, जहां सपेरा समाज के लोग रहते हैं। हाल ही में गांव में एक मामले की सुनवाई को लेकर अदालत लगी थी। सिर पर साफा बांधे पांच जजों की पीठ (पंच परमेश्वर) और दूसरी ओर कतार में वकील बैठकर वादी-प्रतिवादी का इंतजार कर रहे थे। पूछने पर पता चला कि बदायूं के गांव जौंरा से समाज के लोगों के विवाद के मामले की सुनवाई है, लेकिन थोड़ी देर बाद पता चला कि वादी-प्रतिवादी को यहां पहुंचने में शाम हो जाएगी, तो अगले दिन सुनवाई की तारीख मुकर्रर कर दी गई।


ये दी जानकारी
समाज की सुपर पंचायत यानि सर्वोच्च अदालत के बारे में बताते हुए 60 वर्षीय धनपत ने बताया कि सपेरों की इस सर्वोच्च अदालत में वे मामले आते हैं, जिनका समाज की निचली पंचायतों में कोई फैसला नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि यह सपेरे समाज की विशेषता है कि वे अपने आपसी मामलों को लेकर कोर्ट-कचहरी नहीं जाते हैं। समाज में उनके बीच के विवादों का पंच परमेश्वर ही फैलसा करते हैं। कई पीढ़ियों से यहां समाज की सर्वोच्च अदालत लगती आ रही है और यहां जो फैसला लिया जाता है वही मान्य होता है। ऐसा सम्भव ही नहीं कि फैसले को मानने से कोई इनकार करे। यदि कोई फैसले को नहीं मानता तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है और कोई भी नहीं चाहेगा कि उसे उसके समाज से बेदखल किया जाए।