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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल मथुरा में, पूरा देश कर रहा इस घोषणा का इन्तजार

-11 सितम्बर को Veterinary University आ रहे हैं नरेन्द्र मोदी -खुरपका-मुंहपका का टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करेंगे -मथुरा में लम्बे समय से पशुधन विश्वविद्यालय की हो रही मांग

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मथुरा

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Amit Sharma

Sep 09, 2019

नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी

मथुरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मथुरा की सरजमी से देश को पहले पशुधन विश्वविद्यालय की सौगात दे सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह देश के किसानों के हित में एक बड़ा कदम होगा। बहुप्रतीक्षित इस विश्वविद्यालय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मथुरा आगमन की तैयारियों में प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी डेरा डाल दिया है।

ऊर्जा मंत्री के माध्यम से हो चुकी है मांग

सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मथुरा क्यों आ रहे हैं? अभी तक यही सामने आया है कि प्रधानमंत्री मथुरा से तकरीबन पौने तीन सौ करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा करेंगे। इसमें कुछ भी नया नहीं है। 11 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मथुरा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान में आ रहे हैं। खुरपका मुंहपका एवं ब्रसोलासिस जैसी बीमारियों के निदान के लिए वैक्सीनेशन अभियान का शुभारम्भ भी पीएम स्तर का नहीं लगता, लेकिन तैयारियां करोड़ों के बजट वाली हैं। पशुधन विश्वविद्यालय की मांग भी पूर्व में कई बार विभिन्न मंचों से उठती रही है। ब्रज अकादमी का प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के माध्यम से यह मांग कर चुका है। दूसरी ओर वेटरिनरी के अधिकारी भी पूर्व कृषि मंत्री राधामोहन सिंह एवं मंत्री गिरिराज सिंह से इसकी मांग कर चुके हैं।

2 करोड़ के सीटी स्कैनर के लिए तरस रहा विश्वविद्यालय
प्रधानमंत्री के आगमन के लिए तैयार किये जा रहे पाण्डाल के टैंण्ट में जर्मन हैंगर्स लगाये जा रहे हैं। दूसरी ओर 2001 में वेटरिनरी कालेज से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से विश्वविद्यालय के रूप में अस्तित्व में आया यह संस्थान महज दो करोड के सीटी स्कैनर के लिए तरस रहा है। चेन्नई संस्थान में 72 पशु चिकित्सकों का दल 140 की ओपीडी को रिकॉर्ड मानता है। वहीं यहां आधा दर्जन चिकित्सक 110 तक ओपीडी कर डालते हैं।

788 एकड़ में फैला है विश्वविद्यालय
788 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय के पास करीब 1400 एकड़ का माधुरीकुण्ड कृषि फार्म अलग से है। यहां प्रधानमंत्री आ रहे हैं और पशुपालन विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। एफएमडी टीकाकरण निःशुल्क रूप से सालों से चल रहा है। ब्रासोलासिस के टीकाकरण पर कांग्रेस सरकार में भी जोर दिया गया था लेकिन इसे अभियान नहीं बनाया गया। अभी तक विशेषज्ञ को ऐसा मॉडल नहीं दे सके हैं, जिसे किसानों की आय दोगुनी करने के मॉडल के रूप में राज्यों के सामने रखा जा सके।

तीन कृषि विश्वविद्यालय, एक भी पशुधन विश्विद्यालय नहीं
देश का पहला केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय इंफाल में, दूसरा झांसी और तीसरा बिहार में है। बाद के दो विश्वविद्यालय भाजपा सरकार में ही स्थापित हुए हैं लेकिन भी तक देश में एक भी पशुधन विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके गर्ग ने यह मामला पूर्व केन्दीय मंत्री राधामोहन और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के सामने रखा था। उन्होंने इस दिशा में सार्थक पहल करने का भरोसा जताया।

यह जमीन और संसाधन दोनों हैं
यदि वेटरिनरी विश्वविद्यालय को केन्द्र में रख कर भी यह कवायद होती है तो पर्याप्त जमीन और संसाधन दोनों हैं। जानकारों का कहना है कि बगैर पशुधन विकास के किसानों की आय किसी भी कीमत पर दो गुनी नहीं हो सकती।