
जिलाचिकित्सालय बना लापरवाही का अड्डा, डॉक्टरों के चैम्बरों में लटकाता है ताला
मऊ. बदलते उत्तर प्रदेश का नारा. सड़कों पर लगे होर्डिंग्स , विज्ञापनों पर चमकते चेहरे देख एक बार आपको कुछ देर के लिए खुशी भले दे दें। पर हकीकत ये है कि अभी भी सूबे में बदलाव के लिए विज्ञापनों से नहीं बल्कि काम के आधार पर बदलाव के अहसास की जरूरत है।
जी हां हम बात कर रहे हैं मऊ जिला अस्पताल की। 22 लाख की आबादी वाले जिले के सबसे प्रमुख असप्ताल खुद बीमार नजर आ रहा है। कई डाक्टर अपने चेंबर में मिलते नहीं। जो मिलते भी हैं वो मरीजों को सरकारी दवाओं से महरूम रखते हैं। नए साल के पहले ही दिन पत्रिका ने जिला अस्पताल की पड़ताल किया तो पता चला कि जिला अस्तपाल पूरी तरह से लापरवाही का अड्डा बन गया है। 21 डाक्टरों की जरूरत के वावजूद यहां महज 13 डाक्टरों के सहारे मरीजों की रक्षा का दावा किया जा रहा है। जबकि कई डाक्टर ऐसे भी हैं जो कई-कई दिनों तर आते ही नहीं है ऐसा मरीजों और तीमारदारों का कहना है।
निजी क्लीनीक पर बुलाते हैं डाक्टर
एक मरीज के तीमारदार ने पत्रिका से बातचीत मे कहा कि डाक्टर एके रंजन जो चर्म 0 रोग विशेषज्ञ है उन्हे दिखाने के लिए आया था। लेकिन डाक्टर साहब ने मुझे यहां देखने के बजाय अपने निजी क्लीनिक पर आने के लिए बोला है। कहा कि यहां आपका इलाज सही तरीके से नहीं हो पाएगा मेरे निजी अस्पताल पर आकर ही इलाज कराएं। अब बलवंत की परेशानी ये है कि आखिर वो निजी असप्ताल मे दिखाने के लिए ज्यादा पैसे का इंतजाम कैसे करें।
नहीं मिले डाक्टर साहब, लटका रहा ताला
सन्तोष कुमार नाक कान गला रोग विशेषज्ञ आर आर चौहान को दिखाने के लिए आए हुए थे। काफी देर के इंतजार के बाद भी डाक्टर साहब का चेंबर नहीं खुला। गेट पर ताला लटका मिला। संतोष का कहना है कि वो कई बार यहां आते हैं पर ज्यादा बार ऐसा होता है कि डाक्टर साहब नहीं मिलते और हमें वापस लौटना पड़ता है।
बाहर की लिखते हैं दवाईयां
साधना कहती हैं कि कहने को सरकारी अस्पताल गरीबों के लिए है लेकिन मऊ के जिला अस्पताल में गरीबों को कोई राहत नहीं मिलती यहां के डाक्टर बाहर की दवाईयां लिखते हैं। निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी मरीजों से मिले तो कई ने डाक्टरों द्वारा लिखी बाहर की दवाईयों की पर्ची दिखाई जिसके बाद जिलाधिकारी ने जांच के भी आदेश दिए।
Published on:
01 Jan 2019 04:36 pm
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