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चार सौ साल पुरानी दो रुपये कीमत की इस तिजोरी की खासियत देखकर रह जाएंगे दंग, देखें वीडियो

14 इंच मोटी लोहे की चादर से बनी है 250 किलोग्राम की यह तिजोरी  

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चार सौ साल पुरानी दो रुपये कीमत की इस तिजोरी की खासियत देखकर रह जाएंगे दंग, देखें वीडियो

केपी त्रिपाठी, मेरठ। कहते हैं लोहा, मकान और कपड़े की कीमत आंकी नहीं जा सकती। इनकी कीमत सिर्फ इन्हें प्रयोग करने वाला ही समझ और महसूस कर सकता है। जिनके पास ऐसी बेशकीमती चीजें होती हैं वे अपनी इन चीजों की अधिक न तो नुमाइश करते हैं और न ही लोगों को इनके बारे में अधिक चर्चित करने का प्रयास करते हैं। इन्हीं में से एक हैं कारी अशरफ। जिनके घर पर बेशकीमती नायाब तिजोरी है। आप अगर उनकी इस तिजोरी को देख लेंगे तो दंग रह जाएंगे। दंग इसलिए नहीं कि तिजोरी के भीतर रखे रूपये और जेवर को देखकर बल्कि इसलिए कि ये तिजोरी अपने आप में ही बेशकीमती है। कारी अशरफ के मेहमान खाने में 36 इंच चौड़ी दीवार में लगी ये बेशकीमती तिजोरी की खासियत की जितनी चर्चा की जाए उतनी ही कम है।

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14 इंच की चादर से बनी 230 किग्रा की तिजोरी

कारी अशरफ के अनुसार उनके घर में यह तिजोरी 14 इंच की मोटी लोहे की मजबूत चादर से बनी है। इस तिजोरी का वजन उस जमाने में 230 किग्रा था। कारी बताते हैं कि तिजोरी को दीवार के भीतर फिट करने में करीब दो दिन लग गए थे। ये इतनी मजबूती से दीवार में फिट की गई है कि दीवार को आसपास के करीब 12 फीट के एरिया में चारों तरफ से तोड़कर ही इसको निकाला जा सकता है।

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तिजोरी को खोलने की ट्रिक सिर्फ परिजनों के पास

कारी बताते हैं कि पांच पीढ़ी पुरानी इस तिजोरी को खोलने की ट्रिक सिर्फ उनके परिजनों के पास ही है। अगर कोई इस तिजोरी को खोलने की कोशिश करता है तो वह सात जन्म तक तिजोरी को नहीं खोल पाएगा। उन्होंने बताया कि तिजोरी को खोलने की ट्रिक पहले उनके वालिद के पास थी और अब उनकी पत्नी और उनके पास है। उनके बेटे को भी तिजोरी को खोलने की ट्रिक पता है।

गोली, पानी और आग के असर से बेअसर

तिजोरी की लोहे की चादर इतनी मजबूत और मोटी है कि इस पर गोली, पानी और आग का कोई असर नहीं होगा। बड़ी आग में भी इसका मजबूत लोहा नहीं पिघलेगा। यह सुरक्षित रहेगी। वहीं अगर इस पर कोई गोली चलाता है तो गोली तिजोरी से टकराकर गिर जाएगी।

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मात्र 2 रूपये में बनकर तैयार हुई थी तिजोरी

दो रूपये की 230 किग्रा मजबूत तिजोरी सुनकर हैरानी होगी ही, लेकिन आज से 400 साल पहले ये तिजोरी मात्र दो रूपये में ही बनकर तैयार हुई थी। कारी अशरफ के अनुसार उनके वालिद और उनके वालिद के वालिद ने इस बेशकीमती तिजोरी को कितने में बनवाया था यह बताया था। उन्होंने कहा कि मेरठ ही नहीं दिल्ली में भी ऐसी बेशकीमती और मजबूत तिजोरी कहीं नहीं है।