
मेरठ. प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ सोमवार को प्रदेशभर में वकील हड़ताल पर रहे। मेरठ में भी कचहरी में वकीलों के चैंबर बंद रहे। बार एसोसएशन के अध्यक्ष मांगेराम त्यागी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं एडीएम सिटी से मिलकर अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।
मांगेराम त्यागी ने बताया कि प्रयाग में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने दो दिवसीय बैठक कर न्यायिक परिसर में प्रवेश के लिए सीओपी कार्ड को मान्यता नहीं देने पर आक्रोश जताया था। बार कौंसिल के कार्यालय पर बैठक कर इसके खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि सरकार को चेतावनी दी गई थी कि अगर 22 फरवरी तक उनकी समस्याएं निस्तारित नहीं हुईं तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अधिवक्ताओं को सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता न मिलने पर भी चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से अधिवक्ताओं को न्यायिक परिसर में प्रवेश के लिए अलग से जिला जज द्वारा परिचय पत्र जारी किया जा रहा है और वह बार कौंसिल द्वारा जारी सीओपी कार्ड को मान्यता नहीं दे रहे हैं। जबकि सीओपी कार्ड उच्चतम न्यायालय द्वारा अजयिन्दर सांगवान व अन्य बनाम बार कौंसिल ऑफ दिल्ली व अन्य के मामले में दिए गए निर्णय दिनांक 23 अगस्त 2017 के अनुक्रम में अधिवक्ताओं को जारी किया गया है। प्रदेश अधिवक्ताओं के पास सीओपीडी कार्ड होना आवश्यक है, जो कि प्रदेश बार कौंसिल द्वारा जारी किया गया है और यह कार्ड प्रत्येक प्रदेश में मान्य है। इस कार्ड को न मानने पर अधिवक्ताओं में रोष है। इससे विभिन्न विपरीत परिस्थितियां खड़ी हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रवेश कार्ड बनाए जाने को लेकर बार कौंसिल का कोई विरोध नहीं है, परंतु बार कौंसिल द्वारा जारी सीओपी कार्ड न मानना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना एवं बार कौंसिल की प्रतिष्ठा पर भी एक प्रश्नचिह्न लगा रहा है। इसी परिपेक्ष मेे आज दो मार्च को न्यायिक कार्य से विरत रहकर डीएम और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को प्रदेश भर के अधिवक्ता लाल पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शित करेेंगे और न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे और 23 मार्च को तहसीलों पर प्रदर्शन, 30 मार्च को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और 15 अप्रैल को अधिवक्ता ड्रेस में विधान सभा का घेराव करेंगे।
अधिवक्ताओं को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
मांगेराम ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के हित में शुरू की गई योजनाओं जैसे-40 करोड़ रुपये हर साल अधिवक्ताओं को मिल रहा था, उसको भी रोक दिया गया। इससे अधिवक्ताओं की योजनाएं सुचारु रूप से चलाने में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने संकल्प पत्र में किए गए वायदे को भी अभी तक पूरा नहीं कर पाई है।
Published on:
02 Mar 2020 03:39 pm

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