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2020 में अब तक के सबसे घातक स्तर 335 पर एक्यूआई, दिवाली तक 400 के पार पहुंचने के आसार

Highlights - मेरठ समेत पूरे वेस्ट यूपी में वायु प्रदूषण से जिंदगी पर खतरा - मार्च के बाद लॉकडाउन के चलते 50 से भी नीचे पहुंच गया था एक्यूआई - मेरठ और एनसीआर में प्रदूषण के कारण लगभग छह साल कम हुई लोगों की उम्र

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मेरठ

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lokesh verma

Oct 11, 2020

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मेरठ. मार्च के बाद लॉकडाउन में जहां एक्यूआई 50 से भी नीचे पहुंच गया था, वहीं अनलॉक में एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। दिवाली से पहले ही 11 अक्टूबर को मेरठ का एक्यूआई 335 दर्ज किया गया है। मेरठ के साथ ही वेस्ट यूपी अन्य शहरों में भी कमोबेश यही स्थिति है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों को बढ़ते प्रदूषण से कोई मतलब नहीं। प्रदूषण वैज्ञानिक इसकी चिंता कर रहे हैं प्रदूषणविद् नवीन प्रधान का कहना है कि मेरठ और एनसीआर में इस प्रदूषण में रहने वाले लोगों की जिंदगी खतरनाक वायु प्रदूषण की वजह से लगभग छह साल कम हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस साल यानी 2020 में वर्तमान में वायु प्रदूषण अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है। इसके साथ ही मौसम की स्थिति भी तेजी से बिगड़ती जा रही है।

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चिकित्सकों के अनुसार, जहरीली वायु के संपर्क में आने पर फेफड़े, रक्त, संवहनी तंत्र, मस्तिष्क, हृदय और यहां तक कि प्रजनन प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। प्रदूषण पर कई प्रकार के शोध कर चुके नवीन प्रधान बताते हैं कि एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण पूरे देश में पांच लाख अकाल मौतें हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ की आबोहवा पिछले कुछ दिनों से बहुत ही खराब बनी हुई है। शहर में वायु की गुणवत्ता विशेष रूप से सुबह-सुबह अधिक खराब होती है। जब प्रदूषण बहुत अधिक होता है। हालांकि, यह अस्थमा या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए तो घातक है ही। स्वस्थ व्यक्तियों को भी इससे पूरा खतरा है। बुजुर्ग लोग और बच्चे भी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं।

नवीन प्रधान बताते है कि मेरठ ही नहीं पूरे एनसीआर में वायु प्रदूषण पिछले एक सप्ताह से ही घातक स्तर पर पहुंच रहा है। पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने हालात गंभीर होते हुए भी कोई ठोस उपाय नहीं किए हैं। रविवार को मेरठ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर को पार करते हुए 335 से ऊपर पहुंच गया जो कि अब तक का सबसे अधिक है। इसी के साथ वायु प्रदूषण के मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश में मेरठ सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में टॉप पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि अगर कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो यह स्तर दिवाली पर 400 से भी ऊपर तक पहुंच सकता है।

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