
World Breastfeeding Week: नौनिहाल को एेसे कराएं स्तनपान, नहीं तो परेशानी में पड़ सकते हैं मां-बच्चा
मेरठ। विश्व स्तनपान सप्ताह बुधवार एक अगस्त से शुरू हो गया है, यह सात अगस्त तक होगा। एक समय था जब परिवार संयुक्त हुआ करते थे और बच्चे के जन्म के बाद घर की बुजुर्ग महिलाएं प्रसूता को स्तनपान का तरीका समझाया करती थी, जिससे वह सही तरीके से बच्चे को स्तनपान करा सकें और दोनों स्वस्थ्य रह सके। आज जब संयुक्त परिवार ही नहीं रहे तो स्तनपान का तरीका बताने वाली बुजुर्ग महिलाएं भी एकल परिवार की भीड़ में गुम हो गई। आज कई बार गलत स्तनपान कराने से महिलाओं में गंभीर बीमारियां हो रही है। जिसमें स्तन से पूरी तरह से बच्चे द्वारा दूध नहीं पी पाने से दूध स्तन के भीतर गांठ बना देता है जिससे भविष्य में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आइये हम आपको चिकित्सक के माध्यम से बताते हैं कि किस तरह से बच्चे को मां स्तनपान करवाए, जिससे बच्चा और मां दोनो स्वस्थ्य रहे। डा. शुभी काम्बोज ने 'पत्रिका' को बताया कि मां और बच्चे को समर्पित यह खास दिन एक अगस्त यानि आज से शुरू होकर पूरे एक सप्ताह तक मनाया जाएगा। अगर स्तनपान सही नहीं कराया जा रहा है तो मां व बच्चा दोनों के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है। बच्चे को स्तनपान कराते समय मां को सही पोजीशन में बैठना बहुत जरूरी होता है।मां और बच्चे की सेहत को ध्यान में रखते हुए कौन-कौन सी पोजिशन होनी चाहिए, बता रही है डा. शुभी काम्बोज।
जन्म के शुरूआती दिनों में पीठ को टेक देकर
बच्चे के जन्म के शुरुआती दिनों में मां को दूध पिलाते समय अपनी पीठ को टेक देकर बैठना चाहिए। उसकी इस पोजीशन को लेड बैक पोजिशन कहा जाता है। इस पोजिशन में मां 40 डिग्री सेल्सिअस की मुद्रा में बैठती है। इस पोजिशन में मां बच्चे को अपनी गोद में ऐसे रखती हैं कि बच्चे का पेट मां के पेट से जुड़ा होता है और उसका सिर मां के सीने के पास होता है। यह अवस्था स्तनपान के लिहाज से बहुत अच्छी मानी जाती है। इस अवस्था में बच्चे का शरीर पूरी तरह से अपनी मां के सहारे पर निर्भर होता है, लेकिन बच्चे को पकड़ने के लिए मां को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
लेटकर स्तनपान करवाना
डा. शुभी काम्बोज के अनुसार अक्सर महिलाओं को यह वहम रहता है कि यदि वो लेटकर अपने बच्चे को स्तनपान करवाएंगी तो ऐसा करने से बच्चे पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। आप लेटकर भी अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं। इस तरह लेटकर बच्चे को दूध पिलाने से बच्चे और माता के बीच में ज्यादा सम्पर्क बना रहेगा।
कुर्सी या फीडिंग चेयर का उपयोग
आजकल महिलाएं स्तनपान के दौरान कुर्सी या तकिए का इस्तेमाल करती हैं। बाजार में फीडिंग चेयर और नर्सिंग तकिए भी आसानी से मिल जाते हैं। अगर आपको लगता है कि स्तनपान के दौरान बच्चे के गले या मुंह में कोई समस्या है या फिर उसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है तो उस स्थिति में इन उत्पादों को खरीदा जा सकता है।
मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं
हर मां इस बात को जानती है कि उसका दूध उसके शिशु के लिए किसी अमृत से कम नहीं होता है। मां का दूध शिशु को पोषण देने के साथ रोगों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। यही वजह है कि जन्म से छह महीने तक बच्चों को केवल मां के दूध पर ही निर्भर रखा जाता है। मां के दूध की वजह से शिशु को किसी तरह की पेट की गड़बड़ी होने की आशंका नहीं होती है।
Published on:
01 Aug 2018 06:44 pm
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