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मायावती के इन पैंतरों से महागठबंधन की राजनीति में बड़े नेता हुए चित, मिशन 2019 के लिए बसपा सुप्रीमो की यह है तैयारी

सालभर में बसपा में बढ़ रहा है पश्चिम के इन नेताओं का कद  

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मायावती के इन पैंतरों से महागठबंधन की राजनीति में बड़े नेता हुए चित, मिशन 2019 के लिए बसपा सुप्रीमो की यह है तैयारी

केपी त्रिपाठी, मेरठ। तीन राज्यों के चुनाव में बुलंद हौसलों से उतरी बसपा सुप्रीमो मायावती के राजनैतिक पैंतरे से उनके साथ महागठबंधन की बात करते वाले भी सन्न हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जिस तरह से आम चुनाव को लेकर बयानबाजी की है, उससे उनके भतीजे यानी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मुंह पर सियासी चुप्पी साध ली है। राजनीतिक टिप्पणीकार डा. संजीव शर्मा की मानें तो मायावती के ये बयान यूं ही नहीं है। मायावती मौकापरस्त राजनीति जरूर करती है, लेकिन वह यह भी देखती हैं कि उनके साथ कौन है। डा. संजीव कहते है कि अभी जिस तरह से यूपी के उपचुनाव में महागठबंधन का बीज रोपा गया उसका लाभ सभी दलों को थोड़ा-थोड़ा मिला, लेकिन रालोद इसका पूरा लाभ ले उड़ी। अब राजस्थान, मप्र और छत्तीगढ़ में जब महागठबंधन की बात आई तो वहां पर सभी दल अपनी अलग-अलग खिचड़ी पकाने लगे। जबकि इन तीन राज्यों में अगर अन्य दल बसपा का साथ दे तो वहां पर भाजपा को अधिक नुकसान हो सकता है, लेकिन दल ऐसा नहीं कर रहे। इसलिए ही बहन जी ने आम चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी है। डा. संजीव कहते हैं कि यह राजनीति है यहां कुछ भी स्थिर नहीं होता। आगामी आम चुनाव में महागठबंधन की सबसे अहम कड़ी बसपा ही होगी, ऐसा जानकारों का मानना है।भले ही बसपा सुप्रीमो को 2014 और उसके बाद उप्र के विधान सभा चुनाव में जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन इसके बाद ही बहन जी के हौसले बुलंद हैं और वह इस बार भी अकेले ही सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की बात लगातार कह रही है। महागठंधन से बसपा नुकसान में रहेगी और इसका लाभ सर्वाधिक कांग्रेस, सपा और रालोद को होगा। डा. संजीव के अनुसार बसपा को प्रदेश में सबसे अधिक सीटें चाहिए। इसके अलावा बसपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महागठबंधन में किसी अन्य दल का दखल बर्दाश्त नहीं कर सकती। यह क्षेत्र बसपा सुप्रीमो का गढ़ माना जाता हैं। इसके साथ ही यहां पर रालोद की बढ़ती सक्रियता बसपा के लिए नुकसान दायक है।

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दाावेदारों का परखा जा रहा दमखम

बसपा सुप्रीमो द्वारा लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए वह दो तरीके से तैयारी कर रही है। पहली परिस्थिति जिसमें वह गठबंधन को लेकर भी चुनाव लड़ने को तैयार हो। दूसरा सभी सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ने की स्थिति में। हर सीट पर टिकट के दावेदारों को परखने में भी बसपा के इंचार्ज जुटे हैं।

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पश्चिम के इस नेता को मिली राज्यों की कमान

पश्चिम उप्र के बसपा नेताओं का कद भले ही कुछ कम हुआ हो। लेकिन अतर सिंह राव का कद बसपा में लगातार बढ रहा है। मेरठ के बसपा नेता और एमएलसी अतर सिंह राव को हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के प्रभारी के बाद अब मध्यप्रदेश में होने वाले चुनाव में भी उनको जिम्मेदारी दी गई है। वह मध्य प्रदेश में होने जा रहे चुनाव की कमान संभालेंगे और पूरी चुनावी रणनीति बनाएंगे। मध्य प्रदेश में आयोग ने चुनावी तिथियों की घोषणा कर दी है। बसपा मप्र में बिना किसी गठबंधन के अकेले ही चुनावी मैदान में है।

विधानसभा चुनाव बताएंगे कितनी पुख्ता है तैयारी

बसपा की तैयारियों का पता तो आगामी होने वाले विधानसभा चुनाव में चल जाएगा। वहीं महागठबंधन का वजूद भी इन राज्यों के चुनाव परिणाम के भीतर ही छुपा हुआ है। इन राज्यों में बसपा अगर अच्छा परिणाम दर्शाती है तो निश्चित ही वह आम चुनाव में सीटों की बड़े दावेदार के रूप में महागठंधन के दलों में होगी।