
यूपी लोकसभा चुनाव 2024 में गुल खिला सकती है बसपा प्रमुख मायावती और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की नजदीकियां।
लोकसभा चुनाव 2024 यूपी में राजनैतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन रहा है। एक तरफ जहां सपा और बसपा के लिए लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी का जनाधार बचाने की चुनौती है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी नए राजनीतिक समीकरण गढकर यूपी को फिर से अपनी राजनीतिक प्रयोगशाला बनाया है। राजनीतिक जानकारों की माने तो सत्तारूढ़ भाजपा से लोकसभा चुनाव 2024 में अकेले भिड़ने की कुवत किसी दल में नहीं है। हां अगर एक-दूसरे का साथ मिले तो जरूर भाजपा को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में होंगे।
कांग्रेस और सपा के बीच अभी से जुबानी जंग तेज
इंडिया गठबंधन बन तो गया लेकिन यूपी में सीट बंटवारे को लेकर अभी से कांग्रेस और सपा के बीच ठनी हुई है। कांग्रेस और सपा के बीच अभी से जुबानी जंग तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती के तेवर कांग्रेस के खिलाफ 2023 के बाद से कुछ नरम पड़े हैं। बता दें बसपा प्रमुख मायावती ने इंडिया गठबंधन से दूरी बनाई हुई है। लेकिन कांग्रेस के प्रति उनकी नरमी इस बार का संकेत है कि आने वाले समय में अगर लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा को किसी दल से समझौता करना पड़ा तो कांग्रेस को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
यूपी के राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस और बसपा दोनों संपर्क में हैं। हालांकि मायावती ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि बसपा आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'बसपा और कांग्रेस के संभावित एक साथ आने से 2024 के आम चुनाव से पहले नए राजनीतिक बदलाव आने की उम्मीद है।' कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों के वरिष्ठ नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं। उन्होंने हाल में प्रियंका गांधी की बीएसपी प्रमुख मायावती से मुलाकात के बारे में टिप्पणी करने से मना किया।
यूपी में भाजपा को हराने के लिए BSP से भी हाथ मिलाने से परहेज नहीं
यूपी के बड़े कांग्रेसी नेता ने बताया कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर यूपी में भाजपा को हराने के लिए BSP से हाथ मिलाने से परहेज नहीं करेगी। इसलिए इसकी तलाश की जा रही है। बता दें कि इससे पहले जून में कांग्रेस और बसपा के बीच बातचीत की चर्चा शुरू हुई थी। लेकिन जब इंडिया गठबंधन की घोषणा हुई तो चर्चा भी शांत पड़ गई। इंडिया में समाजवादी पार्टी एक घटक दल के रूप में शामिल है।
उत्तर प्रदेश की घोसी और उत्तराखंड की बागेश्वर सीट उपचुनाव से बढ़ी तल्खी
इस बीच कांग्रेस और इंडिया गठबंधन सहयोगी समाजवादी पार्टी के बीच सबकुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि यूपी में विधानसभा उपचुनाव के दौरान घोसी विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन किया और प्रचार भी किया। लेकिन समाजवादी पार्टी ने उत्तराखंड की बागेश्वर सीट पर कांग्रेस के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतार दिया।
घोसी में जहां समाजवादी पार्टी प्रत्याशी को जीत मिली, वहीं बागेश्वर में कांग्रेस उपचुनाव हार गई। दरअसल, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसके लिए सपा को जिम्मेदार बताते हुए असंतोष जताया। हाल में ही अजय राय ने कहा कि 2024 के आम चुनाव में भाजपा को हराना लोकतांत्रिक, राष्ट्रीय और जनहित में जरूरी है।
सपा और कांग्रेस के बीच यूपी में सीट बंटवारे पर आम सहमति विफल!
सूत्रों का कहना है कि काफी प्रयासों के बाद सपा और कांग्रेस के बीच यूपी में सीट बंटवारे पर आम सहमति विफल रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि समाजवादी पार्टी खुद को बड़े भाई की तरह मान रही है। जो लोकसभा चुनाव में सही तरीका नहीं है। राजनीतिक टिप्पणीकार नवीन प्रधान का कहना है कि बसपा और कांग्रेस के एक साथ आने से जीत की संभावना समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तुलना में अधिक है। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन असफल समीकरण है और 2017 विधानसभा में कांग्रेस के लिए प्रिय साबित हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में सपा के वोट बैंक का स्थानांतरण नहीं हुआ।
अस्तित्व के लिए बसपा के लिए गठबंधन समय की जरूरत
लेकिन दलित जो बसपा के आगमन से पहले कांग्रेस से जुड़े हैं। एक अनुशासित वर्ग हैं। उनके स्थानांतरण की संभावना अधिक है। मायावती की अकेले चलने की घोषणा के बारे में उन्होंने कहा कि बसपा इसे स्वीकार नहीं कर सकती है। लेकिन अपने अस्तित्व के लिए बसपा के लिए गठबंधन समय की जरूरत है। इसी के साथ राजनीति में कुछ स्थायी नहीं है। इसलिए, अगर बसपा फैसला करती है। कांग्रेस के साथ गठबंधन का प्रयोग करें, उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।
मुस्लिम और दलित मतदाता लिख सकता है नई इबारत
यूपी में अगर कांग्रेस और बसपा का गठबंधन होता है तो मुस्लिम और दलित मतदाता मिलकर लोकसभा चुनाव में नई इबारत लिख सकता है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम मतदाताओं का रूझान तेजी से बढ़ा है। 2017 के बाद से जितने में चुनाव यूपी में हुए हैं उनमें मुस्लिम मतदाता सपा के पक्ष में जरूर रहा लेकिन सपा में वो दमखम मुस्लिम मतदाता नहीं दिखा। जिसके बूते वो भाजपा को चुनााव में धूल चटा सके।
मुस्लिम चिंतक डॉ. मैराज का कहना है कि यूपी में मुस्लिम मतदाता अब कांग्रेस की तरफ स्वीप कर रहा है। जबकि दलित बसपा का पहले से कैडर वोट रहा है। ऐसे में अगर दोनों दल लोकसभा चुनाव में एक साथ आते हैं तो दलित और मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ सभी सियासी दलों और यहां तक भाजपा को बहुत भारी पड़ सकता है।
Published on:
24 Oct 2023 07:32 pm
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