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गुजरात चुनाव प्रचार से लौटे कांग्रेसी नेता का बड़ा खुलासा, बताया कैसे जीती भाजपा

सूरत में 16 में से 15 सीटे भाजपा को कैसे मिली इसकी जांच की जाए

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मेरठ

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lokesh verma

Dec 19, 2017

Meerut

मेरठ. चुनाव में भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को गुजरात में बहुमत मिल गया हो, लेकिन मोदी गुजरात में जीतकर भी हार गए। यह कहना है गुजरात के सूरत में कांग्रेस की तरफ से चुनाव प्रचार के लिए गए उत्‍तर प्रदेश के उपाध्यक्ष डाॅ. संजीव अग्रवाल का। उन्होंने 25 नवंबर से एक दिसंबर तक राहुल गांधी के साथ चुनाव प्रचार में भाग लिया था। उनका कहना है कि कांग्रेस गुजरात में मजबूती से लड़ी। जनता का निर्णय सि‍र-माथे है। उन्‍होंने कहा कि मोदी जी अपने ही राज्य में बुरी तरह से घिर गए थे। जिस गुजरात में मोदी जी की 2012 के चुनाव 100 से अधिक सीटें आई थी आज वह 99 पर सिमट गई है और जिस कांग्रेस की सीट उस समय 60 थी वह 80 पर पहुंच गई हैं। सरकार भले ही मोदी जी की बन गई, लेकिन वे भाजपा की सीटें बढ़ाने में फेल हो गए हैं। सरकार बनाना आंकड़ों का खेल होता है, जिसमें भाजपा सफल रही है।

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सूरत के अंदर बहक गए वोटर

डाॅ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि सूरत के अंदर लोग बहक गए और उन्‍होंने गलत तरीके से वोटिंग की। उन्हें बीजेपी ने बरगलाया और प्रलोभन दिया गया। गुजरात में एक तरफ राहुल गांधी और उनके साथ कांग्रेसी कार्यकर्ता थे तो दूसरी ओर भाजपा के साथ पूरा प्रशासनिक अमला और केंद्रीय मंत्री से लेकर कैबिनेट सेक्रेटी तक चुनाव मैदान में भाजपा का प्रचार कर रहे थे। चुनाव में कांग्रेस के पास तो कुछ खोने को नहीं था, लेकिन बीजेपी अगर यह चुनाव खो देती तो उसका मनोबल बहुत गिर जाता।

वोटिंग के दिन मोदी जी ने लिया रैली का सहारा

डाॅ. संजीव के अनुसार जिस दिन गुजरात में आखिरी चरण का मतदान था। उस दिन उन्होंने अपना रोड शो करने के लिए रैली का सहारा लिया। इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की गई है।

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गुजरात चुनाव सत्ता की जीत है न कि मोदी की

डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि सूरत में माहौल पूरी तरह से भाजपा के खिलाफ था। वहां पर लोगों का नारा था हमारी भूल कमल का फूल। वहां की 16 में से 15 सीटे बीजेपी को कैसे चली गई इसकी जांच की जाए। इसके अलावा यूपी जैसे बड़े राज्य के चुनाव परिणाम तीन बजे तक पूरे आ गए, जबकि यूपी से कम सीटों वाले गुजरात में पूरा चुनाव परिणाम आने में शाम के छह बज गए। गुजरात चुनाव सत्ता की जीत है न कि मोदी की। कांग्रेस के चुनाव प्रचार के दौरान अधिकारी आयोग का अनुमति पत्र मांग रहे थे, जबकि भाजपाइयों से कुछ नहीं मांगा जा रहा था। भाजपाई बिना आयोग के अनुमति पत्र के चुनाव प्रचार कर रहे थे और रैली निकाल रहे थे।

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