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मिशन 2019: कांग्रेस ने इस मामले में की वेस्ट यूपी की उपेक्षा तो पार्टी नेता दबी जुबान से यह कह रहे

भाजपा नेताआें ने कांग्रेस के वजूद पर उठाए सवाल

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मिशन 2019: कांग्रेस ने इस मामले में की वेस्ट यूपी की उपेक्षा तो पार्टी नेता दबी जुबान से यह कह रहे

मेरठ। कांग्रेस की स्थिति तो देश भर में खराब चल रही है। उत्तर प्रदेश उसका अपवाद नहीं है। कांग्रेस ने अपनी कांग्रेस वर्किग कमेटी की सूची जारी कर दी। कांग्रेस सचिव अशोक गहलौत ने सूची जारी की। हैरत की बात की 23 वर्किग कमेटी सदस्य, 18 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 10 विशेष आमंत्रित सदस्यों में वेस्ट यूपी का सूपड़ा साफ है। इस कमेटी में बात अगर उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व की करें तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी, जतिन प्रसाद समेत कुल पांच सदस्य को शामिल किया गया है। हां, प्रदेश के एक नेता का नाम जरूर इस सूची से निकाल दिया गया वह है जनार्दन द्विवेदी। जो यूपी के चित्रकूट के रहने वाले हैं।

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2014 में मात्र सात फीसदी वोट और दो सीटें

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश से मात्र सात फीसदी मत मिले थे और मात्र दो सीटों पर ही कांग्रेस चुनाव जीती थी। जिन दो सीटों पर कांग्रेस चुनाव जीती वह दोनों सीटे मां-बेटे यानी सोनिया और राहुल की ही थी। वेस्ट यूपी में तो पार्टी का कोई नाम लेने वाला ही नहीं बचा था। वेस्ट यूपी की सभी सीटों पर कांग्रेस चौथे नंबर थी। पांच सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं की जमानत भी जब्त हो गई थी। 2009 में यूपी में कांग्रेस की 22 सीटें आई थी, जो 2014 में घटकर दो पर आ गई। इसके बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस नेतृत्व वेस्ट यूपी में एक बार फिर से ध्यान देगा और यहां के कांग्रेसी नेताओं को पद देकर वोटरों के बीच विश्वास जगाएगी, लेकिन 2014 के बाद से ऐसा कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस की पार्टी स्तर पर कई कमेटियां गठित हुई, लेकिन सभी में वेस्ट यूपी के दिग्गज कांग्रेसियों को उपेक्षा का शिकार होना पड़ा। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व विधायक ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसी उपेक्षा के कारणों से इस क्षेत्र में अब पार्टी का भविष्य अंधकारमय दिखाई पड़ रहा है। भाजपा नेता विनीत शारदा का कहना है कि वेस्ट यूपी ही नहीं पूरी यूपी में भी कांग्रेस अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है। कांग्रेस का जनाधार टूट चुका है। कांग्रेस का वोट बैंक धवस्त हो चुका है। कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा है।

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भाजपा सांसद बोले कांग्रेस नेतृत्व कमजोर कंधों पर

वर्तमान सांसद राजेन्द्र अग्रवाल का इस बारे में कहना है कि दरअसल जिस राहुल गांधी के भरोसे कांग्रेस पार्टी देश की सत्ता में फिर से वापसी की उम्मीद कर रही है। वह बेहद कमजोर है। राहुल गांधी का रिकार्ड तो यह है कि अब तक उनके नेतृत्व में जितने भी चुनाव लड़े गए, उसमें कांग्रेस हारती ही चली आ रही है। उनके नेतृत्व में बीते पांच साल में कांग्रेस पार्टी 24 चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस के लिए यह विश्लेषण का दौर है, लेकिन वह वंशवाद और परिवारवाद के चक्कर में इस विश्लेषण की ओर जाना ही नहीं चाहती है। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सीमित कर दी गई है और युवा नेतृत्व के नाम पर राहुल को थोपने की कवायद चल रही है। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को अब तक 28 बार लांच करने की कोशिश की है, लेकिन वह हर बार फेल रही है। उत्तर प्रदेश और बिहार में वह करीब तीन दशक से हाशिए पर है।

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यूपी में ये थे कांग्रेस के शक्ति मुख्य स्रोत

एक समय था जब उप्र में दलित, आदिवासी, मुस्लिम, ब्राह्मण और कुछ अन्य पिछड़े समुदाय उसकी राजनीतिक शक्ति के मुख्य स्रोत हुआ करते थे। इन्हीं समुदायों से मिलने वाले समर्थन के बूते वह उत्तर प्रदेश और देश की सत्ता पर काबिज थी। देश और उप्र की राजनीति में जो रुतबा कभी कांग्रेस का हुआ करता था, वह अब भाजपा का है। जिन-जिन सूबों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति है, वहां दलित, आदिवासी, ब्राह्मण और अन्य पिछड़ी जातियां अब भाजपा के साथ हैं।

कांग्रेस नेताआें ने यह कहा

कांग्रेस प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी एक तरह से कांग्रेस के चुने नवरत्नों की तरह से हैं। ये पार्टी हाईकमान का फैसला है। ऐसा नहीं है कि यूपी आैर वेस्ट यूपी की उपेक्षा की गर्इ है। पार्टी नेतृत्व हमेशा अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सम्मान देती रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस आरटीआई सेल के उपाध्यक्ष डा. संजीव अग्रवाल ने कहा कि यूपी के बहुत से कांग्रेसी पार्टी के अन्य प्रभागों में पद पर बैठाए गए हैं। इसमें यहां के कांग्रेसियों की उपेक्षा की गई, यह कहना गलत है।