
मेरठ। डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी...मेरठ और वेस्ट यूपी के साथ ही देश-प्रदेश के लिए भाजपा का जाना-पहचाना नाम। जिनकी कभी पार्टी के भीतर तूती बोतली थी। मंच से जब भाषण देने के लिए खड़े होते तो तालियाें की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं लेती थी। आज वही लक्ष्मीकांत वाजपेयी पार्टी में बिना किसी नेतृत्व वाले पद के अपने घर के कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याआें का समाधान करते नजर आते हैं। विधान सभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के चलते शहर सीट क्या हारे, उस दिन से ही पार्टी में दरकिनार कर दिए गए हैं।
बोले पार्टी मेरी मां है
पहले राज्यसभा में कांता कर्दम और अब विधान परिषद में डा. सरोजनी अग्रवाल को वरीयता दिए जाने के बारे में जब डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से 'पत्रिका' ने बात की तो उनका कहना था कि पार्टी उनकी मां है। उन्हाेंने हमेशा पार्टी के लिए काम किया है। ऐसा कुछ नहीं है, वह पार्टी के सभी फैसलों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वह भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बने तो पार्टी ने उन्हें घर से दिल्ली बुलाकर उप्र की कमान सौंपी थी। मुझे घर से बुलाकर जिस मां ने प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी थी, वही मां अब भी यह तय करेगी कि मुझे कहां पर काम करना है। इसलिए उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं कि राज्य सभा या विधान सभा का टिकट नहीं मिला। पार्टी को यह पता है कि उनका उपयोग कहां पर किया जाना है, इसलिए वह निश्चिंत हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का अधिकार है और मां यह तय करती है कि किस बेटे से क्या काम लेना है। उसका निर्णय हमेशा फलदायी और मीठा होता है।
बोले सांसद
सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि डा. वाजपेयी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी ने उन्हें रिजर्व रखा है। उनसे कहां पर कितना बड़ा काम लेना है, यह पार्टी आने वाले समय में तय करेगी।
बोली सांसद
नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद कांता कर्दम ने कहा कि डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने हमेशा प्रदेश और देश में भाजपा का मान-सम्मान बढ़ाया है। हमें उम्मीद है कि पार्टी जल्द ही उन्हें बड़े पद से सम्मानित करेगी।
Published on:
19 Apr 2018 06:19 pm
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