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यूपी पुलिस के एनकाउंटर पर उठे सवाल: बहन की शादी का कार्ड बांटकर लौट रहा था युवक, रास्ते में पुलिस ने पकड़कर मार दी गोली

पीड़ित को पुलिस ने बताया कुख्यात अपराधी एनकाउंटर के बाद पुलिस ने आरोपी को किया परिवार के हवाले बिना गिरफ्तारी जमानत के पीड़ित को भेजा घर

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मेरठ

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Iftekhar Ahmed

Nov 28, 2019

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मेरठ. अपराधियों से निपटने के लिए एक के बाद एक एनकाउंटर करने वाली यूपी पुलिस (UP Police) पर एक बार फिर से फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounter) के आरोप लगे हैं। मेरठ (Meerut) के टेहरकी गांव निवासी एक 20 वर्षीय युवक सैमन खान के पिता निसार खान ने दावा किया है कि मेरठ पुलिस ने उसके बेटे सैमान को डकैती के मामले में दोषी बताकर एक फर्जी मुठभेड़ में गोली मार दी, जबकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इस पूरे मामले की तहकीकात के लिए पत्रिका संवाददाता संजय शर्मा ने मेरठ जिले के शरदना थाना के टेहरकी गांव का दौरा किया।

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पत्रिका संवाददाता मेरठ के टेहरकी गांव में पीड़ित के घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि अपने घर पर एक बिस्तर पर 19 वर्षीय युवक सैमन खान लेटा हुआ है। इस मामले में उनसे जब बात की गई तो उनोंहेन बताया कि 11 नवंबर को उनकी बहन की शादी होने वाली थी। इसी संबंध में कार्ड बांटने के लिए मैं अपने चचेरे भाई शादाब के साथ मुजफ्फरनगर गया था। वहां से लौटते वक्त 17 अक्टूबर को गांव मछरी के पास मेरी बाइक को एक स्कॉर्पियो ने टक्कर मार दी। इसके बाद गाड़ी में बैठे चार-पांच लोगों ने मुझे पकड़कर मेरे पेट में गोली मार दी। इसके बाद मुछे गिरफ्तार करके द्वारकापुरी के जंगल में ले जाया गया। जहां तीन से चार और पुलिस वाले आए। इसके बाद मेरी जांग और ज्वाइंट पर दो और गोली मारकर बोला कि जा तेरा काम हो गया। पीड़ित के परिजन का कहना है कि इसके बाद उसे प्यारे लाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत ज्दाया खराब होने की वजह से एम्स में रेफर कर दिया गया। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि पुलिस एक तरफ सैमन को अपराधी, लुटेरा और शातिर किस्म का बदमाश बता रही है। लेकिन, दूसरी तरफ गोली मारने के बाद अस्पताल में अधमरे हालत में परिवार को सपुर्दकर गायब हो गई। एम्स से डिस्चार्ज होने के बाद अब पीड़ित सैमन खान अपने घर पर है। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर सैमन खान अपराधी है तो वह घर पर क्या कर रहा है? उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल क्यों ही भेजा? इस मामले में जह कंकरखेड़ा थाने के थानाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह राणा से पत्रिका संवाददाता ने बाद की उन्होंने बताया कि गोली लगने से आरोपी की हालत ज्यादा खराब थी। लिहाजा, उसे मेडिकल बेल पर परिजनों के सपुर्द कर दिया गया। वहीं, पीड़ित सैमन के पिता निसार खान ने पत्रिका को बताया कि हमने अपने बेटे की कोई जमानत नहीं कराई है।

पीड़िता की बहन फरीदा बताती है कि उस दिन हम लोग शादी की तैयारी को लिए ज्वेलर की दुकान पर गहने खरीद रहे थे। तभी भाई को गोली मारने की खबर आई। फरीदा ने बताया कि जो पैसे शादी के लिए रखे हुए थे वे सारे पैसे भाई के इलाज में खर्च हो गए और शादी में देने के लिए जो बाइक खरीदी गई थी। वह भी पुलिस ने जब्त कर रखी है। पीड़ित परिवार ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी दूसरे बेटे शादाब ने दी। उसके बाद से उसका फोन बंद है और उसका भी कोई अता-पता नहीं है।

वहीं, इस पूरे मामले में पुलिस का कहना है कि खान को एक "मुठभेड़" के दौरान गोली मार दी गई थी। उसके पास से एक चोरी का मोबाइल फोन, एक स्पोर्ट्स बाइक, एक देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए थे। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक खान ने एक सहयोगी शादाब की मदद से 10 अक्टूबर को एक व्यक्ति से मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन लूट लिया था। पुलिस ने बताया कि सैमन के खिलाफ कई लूट, डकैटी और हत्आया के प्रयास जैसे कई आराधिक मामले दर्ज है। हालांकि, मोबाइल टॉवर लगाने का काम करने वाले सैमान खान ने स्पोर्ट्स बाइक के बिल और बीमा के कागजात दिखाए और कहा कि उन्होंने इसे 9 अक्टूबर को अपने होने वाले बहनोई को शादी में उपहार के रूप में देने के लिए खरीदा था। 25 साल की उनकी बहन फरीदा की 11 नवंबर को शादी तय थी। सैमान ने बताया कि पुलिस वालों में मुझे दो से तीन फुट की दूरी से तीन गो लिया मारी। एक गोली मछरी गांव के पास मारी गई। इस दौरान उसका चचेरा भाई शादाब समय के साथ भाग गया। इसके बाद पुलिस उसे गाड़ी में बैठाकर द्वारकापुरी के जंगल में ले गई, जहां पर जांग और ज्वांट पर 2 और गोली मारी गई। इस में से दो गोली अब भी उसके शरीर में फंसी हुई है। सैमान ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस वालों ने मेरी हत्या के इरादे से तीन गोली मारी थी, लेकिन खुदा का शुक्र है कि मैं जिंदा बच गया। उन्होंने बताया कि एम्स के डॉक्रों ने मुझे बताया कि गोली लगने की वजह से स्पाइनल की समस्या हो गई है। लिहाजा, मैं बिल्कुल भी चल-फिर नहीं पा रहा हूं। डॉक्टरों मुताबिक मुझे चलने के लायक ठीक होने में सालों लग सकते हैं।

वहीं, इस पूरे मामले में कंकरखेड़ा थाने के थानाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह राणा ने 17 अक्टूबर को घटनाओं का क्रम साझा करते हुए कहा कि दोपहर 2 बजे के आसपास कुछ पुलिसकर्मी कंकर खेरा में वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान सैमन खान और शादाब को एक सफेद मोटरसाइकिल पर आते देखा गया था। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें रुकने के लिए कहा, लेकिन वे भाग गए। इस दौरान सेमन एक देसी पिस्तौल के कब्जे में था। उन्होंने पुलिस पार्टी पर गोलियां चलाईं। इसके बाद आत्मरक्षा में पुलिसकर्मियों ने एक गोली चलाई, जिससे सेमन के पेट में चोट आई है। उन्होंने कहा कि शादाब मौके से भाग गया और अब भी फरार है। राणा ने कहा कि इस बारे में वह पूरी तरह निश्चित हैं कि दो लोगों द्वारा कितने शॉट दागे गए।

पीड़ित के परिवार ने इससे पहले की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि मेरे बेटे सैमन के खिलाफ सिर्फ एक एफआईर दर्ज है। वह भी मेरे घर में डकैती के आरोपी भानु के परिवार की ओर से समझाता करने के लिए दबाव बनाने के लिए दर्ज कराई गई थी। पीड़ित सैमन खानके पिता निसार खान ने बताया कि पड़ोस के कुछ लोगों के खिलाफ मैंने डकैती की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा रखी है। उन्हीं में से एक भानू ने में इस घटना के कुछ दिन बाद मेरे दो बेटों के खिलाफ भी घर में घुसकर महिलाओं से छेड़छाड़ और डकैती की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद मामले में समझौते का दबाव बनाया गया, लेकिन मेरे बेटे ने चूंकि कोई गुनाह नहीं कराया था, लिहाजा मैंने समजौते से इनकार कर दिया। इसके बाद लगातार क्राइम ब्रांच की ओर से 2 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की जाती रही और पैसे नहीं देने की हालत में एनकाउंटर करने की धमकियां दी जाती रही और आखिरकार मेरे निर्दोष बेटे को गोली मारकर एनकाउंटर दिखा दिया गया, जोकि पूरी तरह से फर्जी है।

एसपी सिटी ने दिए जांच के आदेश

इस पूरे मामले में एसपी सिटी मेरठ डॉ. एएन सिंह ने कहा कि परिवार वाले क्या कह रहे हैं इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इस मामले में सीओ की अध्यक्षता में जांच बैठा दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।