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Ravidas Jayanti 2021: संत रविदास जयंती पर जगह-जगह हुआ कार्यक्रमों का आयोजन

Highlights - रविदास जयंती पर किया भंडारे का आयोजन- मेरठ में कई स्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन- भक्तों ने संत रविदास के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर किया नमन

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मेरठ

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lokesh verma

Feb 27, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. 'करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियों आस' संत रविदास के इस दोहे को आज उनके अनुयायियों ने आत्मसात किया। संत रविदास जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। महानगर में इस मौके पर जगह-जगह कार्यक्रम और भंडारों का आयोजित किया गया। लालकुर्ती जामुन मोहल्ले में भी संत रविदास की 644वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर लोगों ने संत रविदास को नमन कर उनके चित्र पर पुष्प चढ़ाए। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के सम्मानित लोग भी उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए संत रविदास के अनुयायी कैंटोनमेंट बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा ने कहा कि गुरु रविदास ने भक्ति मूवमेंट को अपनी भागीदारी से हर जगह प्रख्यात कर दिया था। गुरु रविदास के वचनों में इतनी ताकत थी कि लोग उनसे दूर-दूर से मिलने आते थे। कहा जाता है कि अपने भक्तिमय गानों और दोहों की वजह से उन्होंने भक्ति मूवमेंट के उपदेशों को लोगों तक पहुंचाया। जयंती के अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने प्रसाद चखा। कार्यक्रम में सुनील कुमार, संजय अंकित प्रेमी, लक्की,रामू, नवीन, अरुण, बुधराम प्रेमी, रोशन, शशि बाला आदि का विशेष सहयोग रहा।

वहीं, संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती के मौके पर बाबू जगजीवनराम प्रतिमा स्थल डिग्गी तिराहा गढ़ रोड पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत रविदास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम में एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता भगवान सिंह रविदासी और संचालन सुभाष चंद्र एडवोकेट ने किया। गोष्ठी में भगवत सिंह ने कहा कि गुरु रविदास समता वादी क्रांति के जनक थे। उन्होंने छुआछूत, जात-पात, ऊंच-नीच और रुढिवादी परंपराओं का विरोध किया। रिटायर्ड आयकर आयुक्त डीवी सिंह ने कहा कि रविदास ने कुरीतियों को दूर करने के लिए सच और साहस को आधार बनाया।

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