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योगेश वर्माः हस्तिनापुर का पूर्व विधायक, निष्कासन के बाद वापसी…अब मेरठ में बवाल का आरोपी

बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबियों में होती है गिनती, अब हिस्ट्रीशीट खुलने की बारी

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मेरठ। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मेरठ में बवाल के आरोपी बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा की गिनती बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी नेताआें में होती रही है, यह तब है जब 2012 में मायावती ने इस विधायक का हस्तिनापुर से टिकट काटा आैर फिर निष्कासित कर दिया था। इसके बाद योगेश ने पीस पार्टी ज्वाइन करने के बाद चुनाव लड़ा आैर फिर हारने के बाद 2013 में बसपा में वापसी भी कर ली थी। अपनी दबंगर्इ के लिए जाने जाने वाला योगेश वर्मा ने निकाय चुनाव में एससी महिला आरक्षित सीट पर अपनी पत्नी सुनीता वर्मा को मेयर पद पर चुनाव लड़वाया। सुनीता मेयर बन गर्इ। इसके बाद दो अप्रैल को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान योगेश वर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। आरोप है कि इस पूर्व विधायक ने भीड़ को भड़काया आैर मेरठ में कर्इ जगह हिंसक वारदातें करार्इ गर्इ। एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है कि योगेश वर्मा की हिस्ट्रीशीट भी खोली जा रही है।

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इस वजह से जानते हैं लोग

2007 में हस्तिनापुर से विधायक रहे योगेश वर्मा को शुरू से ही अपनी दबंगर्इ के लिए जाना जाता रहा है। विधायक रहते ही जमीनों पर अवैध कब्जे समेत कर्इ मामलों के आरोपी आैर पार्टी विरोधी गतिविधियों काफी शिकायतेंं मिलने के बाद बसपा सुप्रीमो ने योगेश को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यह दूसरा मौका है जब योगेश की हिस्ट्रीशीट खुल रही है, इससे पहले 1996 में उसकी हिस्ट्रीशीट खुली थी, लेकिन विधायक बनने के बाद अपने प्रभाव से इसे बंद करवा दिया था। योगेश के साथ समर्थकों की भीड़ हमेशा रही है, यही वजह रही कि बसपा से निष्कासन के बाद जब योगेश ने हस्तिनापुर से पीस पार्टी के टिकट पर 2012 में चुनाव लड़ा तो सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि को बेहद कड़ी टक्कर दी थी। प्रभुदयाल की इसमें जीत हुर्इ थी, लेकिन मायावती को अपनी स्थिति का अहसास जरूर करा दिया था योगेश ने। यही वजह रही कि अगले साल ही मायावती ने योगेश को फिर बसपा में वापसी करा दी थी।

मायावती का करीबी नेता योगेश

पिछले साल निकाय चुनाव में योगेश की दलित व मुस्लिम वोट बैंक में दखलंदाजी ही थी उसने भाजपा के गढ़ में अपनी पत्नी को मेयर पद पर काबिज कराया। बसपा जब भाजपा की वजह से एक-एक सीट के लिए जूझ रही थी, तो मेरठ नगर निगम में मेयर पद पर बसपा उम्मीदवार के जीतने पर योगेश की गिनती मायावती के करीबी नेताआें में होने लगी। इसके अलावा मायावती आैर बसपा के जितने भी कार्यक्रम मेरठ जनपद में हुए हैं, उनमें योगेश वर्मा के साथ सबसे ज्यादा भीड़ रहती आयी है।

अब मेरठ में बवाल का आरोपी

अब जेल में बंद दो अप्रैल को पूर्व विधायक को वेस्ट यूपी में अपना कद आैर बड़ा करने के इरादे से मेरठ बवाल करने का आरोपी भी माना जा रहा है। बताते हैं कि योगेश वर्मा ने दलित समाज के युवकों को भड़काया आैर उन्होंने मेरठ की सड़काें पर तांडव किया। अब एसएसपी ने हिस्ट्रीशीट दोबारा खोलने के निर्देश दिए हैं आैर सभी मुकदमों के रिकार्ड खंगालने भी शुरू करवा दिए हैं। मुकदमों में थापर नगर में 2009 में ज्ञानेंद्र बंसल की प्त्नी लक्ष्मी बंसल की संदिग्ध हालत में मौत हो गर्इ थी। जिसमें पूर्व विधायक योगेश वर्मा समेत आठ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। योगेश वर्मा का पुराना रिकार्ड ठीक नहीं है। अब इस पूर्व विधायक की मुश्किलें बढ़ेंगी।

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