2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

किसान संगठनों का ऐलान: फैसला जो भी हो, 26 जनवरी को होगी ट्रैक्टर परेड

Highlights - अकेले मेरठ से 500 ट्रैक्टर ले जाने का लक्ष्य पूरा करने में जुटा भारतीय किसान संघ - किसान संघ के नेशनल कोर्डिनेटर ने बताई आगे की रणनीति - 60 किसान संगठन के किसान एकता मंच के राष्ट्रीय कोर्डिनेशन कमेटी के सेक्रेट्री कर रहे किसानों को तैयार

2 min read
Google source verification

मेरठ

image

lokesh verma

Jan 18, 2021

farmer-tractor-parade.jpg

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. किसानों और केंद्र के बीच 26 जनवरी लेकर खींचतान जारी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से भी किसान संगठन संतुष्ट नहीं हैं। वहीं किसानों के 60 संगठनों को लेकर बने किसान एकता मंच ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के अपने फैसले कायम है। ऐसे में किसान एकता मंच के राष्ट्रीय कोर्डिनेशन कमेटी के सेकेट्री नवीन प्रधान इन दिनों किसानों को 26 जनवरी की परेड में शामिल करने के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के दौरों पर हैं। मेरठ से भी उन्होंने 500 ट्रैक्टर परेड में शामिल होने की बात कही है।

यह भी पढ़ें- शीतलहर से ठिठुरे लोग, ठंड ने तोड़ा पिछले कई साल का रिकॉर्ड, 22 जनवरी से बारिश की चेतावनी

'पत्रिका' से बातचीत में सेकेट्री नवीन प्रधान ने बताया कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कृषि के तीन कानूनों को रद्द नहीं, बल्कि सस्पेड किया है। कोर्ट को कृषि कानून रद्द करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस कमेटी के एक पदाधिकारी ने गठन के तुरंत बाद ही अपना इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में कमेटी किसानों के हित में फैसला लेगी इस पर संशय है। उन्होंने बताया कि 25 जनवरी को ट्रैक्टर पर दो-दो तिरंगे लगाकर दिल्ली कूच करने का निर्णय लिया गया है।

नवीन ने बताया कि सभी दल और संगठनों को आपसी मतभेद मिटाकर कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन में सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बैठक होनी है, जिसमें फैसला चाहे कुछ भी रहे। किसान 25 जनवरी को दिल्ली जरूर जाएंगे। क्योंकि अब यह लड़ाई किसान और सरकार के बीच की है। उनका कहना है कि पिछले दो महीने से कड़कड़ाती ठंड में धरने पर बैठे किसानों से बात करने की जहमत तक सरकार नहीं उठा रही। किसान आंदोलन में 60 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं। किसानों की यह शहादत बेकार नहीं जाएगी।

यह भी पढ़ें- कोरोना की मार: 2020 में ताज का दीदार करने वाले पर्यटकों की संख्या में आई 76% की कमी

Story Loader