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OMG! ‘स्वर्ग’ से एक करोड़ रुपये का मुआवजा लेने पहुंच गए सांसद, जानें क्या है पूरा मामला

स्वर्ग से एक करोड़ रुपये का मुआवजा लेने के लिए राज्यसभा के एक सांसद अफसरों के पास पहुंच गए और उन्होंने अपने दस्तावेज भी पेश कर दिए। मुआवजा जमीन का है जो कि राज्यसभा सांसद के नाम है और उनकी मृत्यु 8 वर्ष पहले हो चुकी है। अफसरों ने मुआवजे की राशि रोकते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

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मेरठ

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lokesh verma

Nov 03, 2021

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मेरठ. जनता पार्टी से दो बार सांसद मेरठ निवासी प्रेम मनोहर के निधन को लंबा समय हो गया है। बताया जा रहा है कि दिवंगत प्रेम मनोहर की करीब 80 बीघा जमीन हाईवे के चौड़ीकरण में अधिग्रहीत कर ली गई, जिसका कि मुआवजा करीब 1 करोड़ रुपये बैठता है। इसी बीच एक करोड़ रुपये मुआवजे को लेकर अफसरों के सामने उस समय अजीबो-गरीब स्थिति आ गई, जब एक व्यक्ति ने खुद को प्रेम मनोहर बताते हुए संबंधित दस्तावेज अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर मुआवजे की रकम मांगी। उस व्यक्ति ने बकायदा प्रेम मनोहर के नाम से बैंक खाते की पूरी डिटेल भी दी है। इस भुगतान की प्रकिया शुरू होनी थी कि इससे पहले ही एक अन्य व्यक्ति ने खुद को दिवंगत सांसद प्रेम मनोहर का पुत्र बताकर दावा किया कि उनकी मृत्यु आठ साल पूर्व हो चुकी है। अफसरों ने भुगतान प्रक्रिया तत्काल रुकवाकर दोनों के दावों की जांच एसडीएम मवाना को सौंपी है।

दरअसल, 6 अक्टूबर 1923 को जन्मे प्रेम मनोहर जनता पार्टी के नेता थे। पहली बार 1968 से 1974 तक और दूसरी बार 1977 से 1980 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे। प्रेम मनोहर के नाम राष्ट्रीय राजमार्ग 119 (मेरठ-पौड़ी हाईवे) पर बहसूमा के पास गांव समसपुर में लगभग 80 बीघा कृषि भूमि है। हाईवे के चौड़ीकरण में प्रेम मनोहर की भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसका मुआवजा करीब एक करोड़ रुपये बनता है। इसके भुगतान के लिए प्रेम मनोहर खुद एडीएम भूमि अध्याप्ति के कार्यालय पहुंचे और आधार कार्ड, मूल निवास, मतदाता पहचान पत्र तथा बैंक खाता की पासबुक आदि दस्तावेज पेश करके दावा किया था।

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फर्जी दस्तावेज बनने पर अधिकारी भी हैरान

जिलाधिकारी के निर्देश पर इस मामले की जांच एसडीएम मवाना को सौंपी गई है। वे दोनों दावों की जांच करेंगे। यदि प्रेम मनोहर की मृत्यु साबित होती है तो यह जांच होगी कि प्रेम मनोहर के नाम के फर्जी दस्तावेज कैसे बने? कई दस्तावेजों में लेखपाल की रिपोर्ट लगी है। साथ ही लेखपाल ने प्रेम मनोहर की शिनाख्त का प्रमाण-पत्र भी जारी किया है। लिहाजा कार्रवाई के निशाने पर लेखपाल है।

20 साल से रहते हैं मुंबई में

बता दें कि मुआवजे के लिए पहला चेक लगभग 84 लाख रुपये का तैयार किया गया। इसे सौंपने से पहले ही एक अन्य व्यक्ति प्रशांत ने एडीएम आफिस पहुंचकर बताया कि प्रेम मनोहर की मृत्यु हो चुकी है। वह और प्रणव दो भाई अब उनके वारिस हैं। वह बीस साल से मुंबई में रहते हैं। उन्होंने धोखेबाज लोगों पर कार्रवाई की मांग की। अब इस पूरे प्रकरण में एडीएम भूमि अध्याप्ति सुल्तान अशरफ सिद्दीकी का कहना है कि दिवंगत प्रेम मनोहर पूर्व राज्यसभा सदस्य थे। उनके नाम के मुआवजे के लिए दो आवेदन मिले हैं। मामला गंभीर है। इसकी जांच एसडीएम मवाना को सौंपी गई है।

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