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राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए इस धर्म गुरू ने कहा- सरकार को ट्रस्ट बनाने का अधिकार नहीं

Highlights मेरठ पहुंचे काशी स्थित रामालय न्यास के सचिव अवि मुक्तेश्ववरानंद रामालय न्यास ही मंदिर निर्माण के लिए सबसे प्रबल दावेदार कहा- तीन ट्रस्ट ही हैं, जो राम मंदिर के निर्माण का दावा कर सकते हैं

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मेरठ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने के निर्देश देने की बात पर हिंदू धर्म गुरुओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आज मेरठ पहुंचे काशी स्थित रामालय न्यास के सचिव अवि मुक्तेश्वरानंद महाराज ने इस बात का खंडन करते हुए कोर्ट के निर्णय को सही ढंग से प्रस्तुत न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार इस मामले में वर्ष 1993 में अधिग्रहित की गई राम जन्मभूमि के समय या बाद में अस्तित्व में आए मंदिर निर्माण से जुड़े किसी ट्रस्ट को ही मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दे सकती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सिर्फ रामालय न्यास सहित तीन ट्रस्ट ऐसे हैं जो मंदिर निर्माण के लिए दावा कर सकते हैं। इनमें भी रामालय न्यास ही मंदिर निर्माण के लिए सबसे प्रबल दावेदार है।

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दरअसल आज अवि मुक्तेश्वरानंद महाराज राम मंदिर निर्माण के लिए शक्ति पूजा करने सम्राट पैलेस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में पहुंचे थे। जहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंदिर निर्माण से जुड़ी कुछ बातों को स्पष्ट किया। उन्होंने धार्मिक यात्रा और पर्यटन को एक साथ जोड़े जाने को लेकर चिंता जाहिर की। इसी के साथ पर्यटन विभाग की तरह देश में तीर्थ यात्रा विभाग बनाए जाने की भी पैरवी की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पर्यटन और तीर्थ यात्रा को एक साथ जोड़े जाना गलत है। मुस्लिम नेता ओवैसी की बाबत सवाल पूछे जाने पर उन्होंने ओवैसी को मुस्लिम धर्मगुरु न बता कर एक मुस्लिम राजनैतिक नेता बताया।

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उन्होंने कहा कि राजनीति करने वाला चाहे हिंदू हो या मुस्लिम वह कभी भी बिना किसी राजनीतिक भावना के धर्म से जुड़ा कोई बयान नहीं दे सकता। मंदिर निर्माण के मुद्दे पर हिंदू संगठनों में किसी विवाद की बात को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी हिंदू संगठन अपने आपसी विवाद को राम मंदिर निर्माण से जोड़ रहे हैं, वह सिर्फ अपने स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दोबारा से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने की बात पर उन्होंने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुना चुका है। इसके बावजूद यदि दूसरा पक्ष इसे चुनौती देना चाहता है तो यह उसका अधिकार है और वह स्वतंत्र है। मगर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हर हालत में होकर रहेगा, भले ही इसमें कुछ देर लग जाए।