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इस हनुमान सिद्धपीठ में दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं कष्ट

मेरठ के बुढ़ाना गेट हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती पर दूर-दूर से आते हैं भक्तजन  

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मेरठ। मेरठ का बुढ़ाना गेट स्थित हनुमान मंदिर। जिसकी मान्यता पूरे पश्चिम उप्र में हनुमान सिद्धपीठ के रूप में है। इस हनुमान सिद्धपीठ मंदिर में दूर-दूर से हनुमान के भक्त माथा टेकने और पूजा करने आते हैं। इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने वालों में आसपास जिले के दिग्गज राजनीतिज्ञ, बड़े-बड़े व्यापारी और नौकरशाह तक हैं। जो प्रतिदिन नित्य मंदिर में दर्शन करने आते हैं। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में हनुमान भक्तों की इतनी भीड़ हो जाती है कि यहां पर पैर रखने की भी जगह नहीं होती। लोगों को लाइन में लगकर मंदिर में दर्शन करते हैं। कभी-कभी तो दो से तीन घंटे लग जाते हैं नंबर आने में। मंगलवार को सुबह से ही हनुमान के भक्तों का भंडारा शुरू हो जाता है, जो देर शाम तक चलता है।

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अति प्राचीन मंदिरों में से एक सिद्धपीठ

बुढ़ाना गेट का हनुमान मंदिर अति प्राचीन हनुमान मंदिरों में से एक है। बताते हैं कि यह मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है। जिस स्थान पर यह मंदिर है उस स्थान पर कभी अखाड़ा हुआ करता था। उस अखाड़े में युवक पहलवानी किया करते थे। जानकारों के अनुसार अखाड़े के आसपास जंगल था और रात में तरह-तरह की अजीब सी आवाजें आती थी। एक दिन अखाड़े में मिट्टी की खुदाई के दौरान यहां रह रहे युवकों को हनुमान जी की पत्थर की एक छोटी सी मूर्ति मिली। युवकों ने इस हनुमान की मूर्ति का अखाड़ा प्रांगण में खड़े पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया। इसके बाद छोटे से मंदिर का निर्माण कर वहां पर मूर्ति की स्थापन कर दी। मूर्ति की स्थापना मात्र से ही मंदिर के आसपास लोगों का रहना शुरू हो गया और जो अवाजें आदि सुनाई देती थी वह भी बंद हो गई। अखाड़े में पहवानी करने वाले युवकों ने तब मंदिर में मंगलवार को सुंदरकांड पाठ पढ़ना शुरू कर दिया, तो आज तक वह परंपरा बनी हुई है। हर मंगलवार को मंदिर प्रांगण में सुंदर कांड का पाठ होता है और प्रतिदिन शाम को मंदिर में रामायण की चौपाई पढ़ी जाती है।

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