इन शहरों में घर बनाना हुआ महंगा, नक्शा पास कराने के लिए देना होगा अधिक दाम

Highlights:

— सबसे अधिक दरें गाजियाबाद में बढ़ी

— एमडीए और अवास विकास के मकानों पर नहीं लागू होगी व्यवस्था

— नई व्यवस्था अप्रैल से होगी लागू

By: Rahul Chauhan

Published: 26 Jan 2021, 01:35 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मेरठ। मेरठ सहित पांच बड़े जिलों लखनऊ, कानपुर, आगरा और गाजियाबाद में नक्शा पास कराना अब काफी महंगा हो जाएगा। राज्य सरकार ने विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने के लिए जमा कराए जाने वाले शुल्क में वृद्धि कर दी है। गाजियाबाद में विकास शुल्क 2500 रुपये से बढ़ाकर 3208 रुपये प्रति वर्ग मीटर और मेरठ में यह 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है। वहीं लखनऊ, कानपुर और आगरा में इसे 1400 से 2040 रुपये प्रति वर्ग मीटर किया गया है। नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू होगी। एमडीएम और आवास विकास परिषद के मकानों पर यह संशोधन लागू नहीं होगा। इसके साथ ही कोरोना जैसी महामारी या आपदा जैसी स्थितियों में विकास शुल्क में छूट देने या इसे किस्तों में देने की सुविधा भी दी गई है।

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बता दें कि प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (प्रथम संशोधन) नियमावली 2021 को मंजूरी दी गई। अभी तक विकास शुल्क नियमावली 2014 में पांच श्रेणियों में 400 से 2500 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क लेने की व्यवस्था थी। विकास प्राधिकरणों को हर साल 15 फरवरी को गत वर्ष के आयकर विभाग के कॉस्ट इंफलेशन इंडेक्स के आधार पर विकास शुल्क को संशोधित कर 1 अप्रैल से लागू करना होगा। बस्ती और मिर्जापुर नई विकास प्राधिकरणों में विकास शुल्क लेने की व्यवस्था पहली बार लागू की गई है। महामारी या आपदा में छूट, दैवीय आपदा, आग, विस्फोट, बाढ़, युद्ध, हड़ताल, आतंकवादी घटना, महामारी, वैश्विक महामारी, नागरिक अशांति, प्राकृतिक आपदा आदि की दशा में राज्य सरकार को विकास शुल्क को किस्तों में भुगतान करने और उस पर देय ब्याज की दरों को कम या माफ करने का अधिकार होगा। यह भी व्यवस्था दी गई है कि अधिनियम के अधीन या कैबिनेट की मंजूरी के बाद विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।

पहले से स्वीकृत मानचित्र पर व्यवस्था

पहले से स्वीकृत मानचित्र वालों के लिए भी सुविधाएं दी गई हैं। उदाहरण के लिए किसी भूखंड का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर है और अनुमन्य एफएआर 1.5 है, तो इसके सभी तलों पर समेकित अधिकतम 150 वर्ग मीटर बिल्ट-अप क्षेत्रफल मंजूर किया जाएगा। इसके आधार पर विकास शुल्क की गणना की जाएगी।

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एक हेक्टेयर पर किस्तों में भुगतान

बहुउद्देशीय खुले स्थल व क्षेत्रीय पार्क आदि से प्रस्तावित निर्माण के लिए विकास शुल्क पूरे क्षेत्रफल के आधार पर लिए जाने की व्यवस्था थी। इसे संशोधित करते हुए निर्माण योग्य क्षेत्रफल यानी एफएआर के आधार पर कर दिया गया है। मौजूदा समय पांच हेक्टेयर से बड़े भूखंड के लिए विकास शुल्क का भुगतान किस्तों में लिए जाने की व्यवस्था है। इसे अब एक हेक्टेयर से बड़े भूखंडों पर लागू किया गया है। इसे दो साल में 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लेने की सुविधा दी गई है। किसी व्यक्ति द्वारा पूर्व स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण कर लिया गया है और परमिट से इतर अतिरिक्त निर्माण का प्रस्ताव होने पर विकास शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त निर्माण के लिए भूमि क्षेत्रफल के सापेक्ष पूर्व में भुगतान किए गए शुल्क के समायोजन के बाद विकास शुल्क लिया जाएगा।

विकास प्राधिकरण वर्तमान बढ़ा अंतर

गाजियाबाद 2500 3208 708
लखनऊ 1400 2040 640
कानपुर 1400 2040 640
आगरा 1400 2040 640
मेरठ 1000 1200 200

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