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मेरठ छावनी में जासूसीः पाकिस्तान की सेना कर रही थी सिग्नल फ्रीक्वेंसी को कैच करने की कोशिश!

मेरठ छावनी में अन्य जवानों से भी चल रही पूछताछ

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मेरठ छावनी में जासूसीः पाकिस्तान की सेना कर रही थी सिग्नल फ्रीक्वेंसी को कैच करने की कोशिश!

मेरठ। मेरठ छावनी की सिग्नल कोर फ्रीक्वेंसी को सीमा पास से कैच करने की कई बार नाकाम कोशिश की गई। सेना की इंजीनियर कोर ने जब इसकी जानकारी की तो मामले की तह तक पहुंची। पता चला कि सिग्नल फ्रीक्वेंसी के गुप्त कोड जो कि सिग्नल कोर के अलावा और किसी को पता नहीं होते वह सीमा पार बैठे पाकिस्तान सेनाओं के पास पहुंच रहे हैं। बस सेना की गुप्तचरों ने यहीं से जांच शुरू की और मामले की तह तक पहुंच गई। सैन्य सूत्रों के अनुसार जो जवान पाकिस्तान को गुप्त सूचनाएं और कोडवर्ड भेजने का काम कर रहा था, वह पाकिस्तान के फोन नंबरों पर भी कई बार बात चुका था।

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व्हाट्स एेप के जरिए कोडवर्ड भेजे

अहम जानकारी यह भी मिली है कि पकड़े गए जवान ने व्हाट्स एेप के माध्यम से सैन्य कोडवर्ड को पाकिस्तान के वाटस एेप नंबर पर भेजा था। सेना इंटेलिजेंस को करीब पांच माह पूर्व इसके इनपुट मिले थे, लेकिन जवान पर पूरी तरह से शक होने के बाद उस पर बीते तीन माह से नजर रखी जा रही थी। सबूत पुख्ता होने के बाद उसको सेना पुलिस ने पकड़ लिया। बताते चलें कि सिग्नल कोर सेना का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। जिसके पास सेना की तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होती हैं।

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एक से ज्यादा जवान भी हो सकते हैं

ये जानकारियां कोडवर्ड में होती हैं और वो कोडवर्ड एक अधिकारी या जवान के पास न होकर कई अधिकारियों और जवानों के कोडवर्ड को एक कर पूरा किया जाता है। सेना सूत्रों के अनुसार पकड़ा गया जवान अकेले यह काम नहीं कर सकता। उसके साथ करीब आठ लोग और हैं। जिनसे अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। मामले की तह तक जाने के लिए पूरी पड़ताल की जा रही है। इसकी जानकारी सेना के मुख्यालय और गृह मंत्रालय भी दी जा चुकी है। मेरठ की सैन्य छावनी से पहली बार किसी सैनिक को पाकिस्तान के लिए जासूसी करते गिरफ्तार किया गया है। वह भी सैन्य पुलिस के द्वारा। पकडे़ गए जवान से कई चौंकाने वाली जानकारियां प्राप्त हुई हैं।