Jewar International Airport : जेवर इंटरननेशनल एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद इसके निर्माण कार्य का काम शुरू हो चुका है। देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट कई मायनों में विकास के आयामों को नई गति देगा। इससे जहां पश्चिमी उप्र (WEST UP) के प्रमुख व्यवसायों को अंतराष्ट्रीय (international) स्तर पर उड़ान मिलेगी वहीं उत्तरी भारत में विकास की गति और तेज होगी।
मेरठ . Jewar International Airport : ग्रेटर नोएडा के जेवर में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। वो जेवर सहित पूरे वेस्ट यूपी और एनसीआर (NCR) की जनता के लिए गौरव का पल था। इससे जहां कार्गो और फ्रेट कॉरिडोर हब बनने से वेस्ट के उद्योगों को रफ्तार मिलेगी। वहीं मेरठ से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना भी आसान हो जाएगा। मेरठ से जेवर एयरपोर्ट तक मात्र 80 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान ही पीएम मोदी (Pm Modi) ने इस क्षेत्र को इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब को विकसित करने की भी घोषण की है।
रैपिड रेल कॉरिडोर से जेवर एयरपोर्ट तक
दिल्ली से मेरठ तक बन रहे 82 किमी के रैपिड रेल कॉरिडोर (rapid rail corridor) को दिल्ली के न्यू अशोक नगर स्टेशन से सीधा जेवर एयरपोर्ट को जोड़ा जाएगा। जल्द ही इस कॉरिडोर का निर्माण कर वर्ष 2024 में शुरू होने वाले जेवर एयरपोर्ट के साथ ही इसे भी लिंक किया जा सके। दिल्ली से मेरठ रैपिड रेल (Delhi to Meerut Rapid Rail) से 55 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। न्यू अशोक नगर से जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में 25 मिनट लगेंगे। मेट्रो, रैपिड से जुड़ने के बाद आसानी से पहुंचा जा सकेगा, जिससे यात्रियों को भी काफी लाभ होगा। अभी मेरठवासियों को हवाई जहाज का सफर तय करने के लिए इंदिरा गांधी अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट (airport) जाना पड़ता है।
मेरठ सहित इन उद्योगों को मिलेगी उड़ान
मेरठ का खेल उद्योग (sports industry) का टर्न ओवर करीब एक हजार करोड़ रुपये का होता है। इससे नोएडा में बन रहे लॉजिस्टिक गेटवे (logistic gateway) से सीधा लाभ मेरठ के उद्योगों को होगा। नोएडा एयरपोर्ट के पास ही कार्गों हब और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Cargo Hub and Dedicated Freight Corridor) का दादरी में में लॉजिस्टिक हब बन रहा है। यहां से सीधा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर पर समान पहुंचाया जा सकेगा। जेवर एयरपोर्ट पर एक टर्मिनल को ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी सामान ढोने की क्षमता लगभग 50 टन होगी। अभी मेरठ से खेल उद्योग का सामान दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-टू (terminal-two) से जाता है और यहां तक पहुंचने में करीब 4 घंटे का समय लग जाता है।