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दावा! इस व्यक्ति ने 2012 में जताया था कोविड-19 का खतरा, बोला- आयुर्वेद के सामने नहीं टिक पाएगी तीसरी लहर

पहली और दूसरी लहर में आयुर्वेद को कर चुके लोग आत्मसात। आर्गेनिक अर्क और हर्बल अर्क लोगों को संक्रमण से बचाया।

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मेरठ

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Rahul Chauhan

Jul 18, 2021

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मेरठ। आयुर्वेद के सामने अब कोरोना की तीसरी लहर नहीं टिक पाएगी। पहली और दूसर लहर में आयुर्वेद को लोग आत्मसात कर चुके हैं। ये कहना है उमालक्ष्मी के निदेशक जीतेश दवे का। दावा है कि उन्होंने वर्ष 2012 में ही कोविड-19 महामारी का खतरा जता दिया था। जब प्रतिरक्षा निर्माण के उद्देश्य से एक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन 'बायोरन्यू' निकाला। दिलचस्प बात यह है कि बोतल पर ब्रांडिंग में खतरनाक नुकीले कोरोना बॉल की तस्वीर थी। जिसे हम आज देखते हैं और इसे दूर रखने के लिए एक हाथ को दिखाया था।

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उन्होंने आगे जोर दिया कि आयुर्वेद में कोविड-19 के लिए एक सहायक उपचार विकल्प व पर्याप्त क्षमता और संभावनाएं हैं। कोविड-19 संक्रमण के कारण पनपी व्यथित मनोवृत्तियों की प्रतिक्रिया को आयुर्वेद के प्रभाव से कैसे ठीक किया जाता है उसे समझने के लिए शोध अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण है। जो लोगों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कोविड-19 का खौफ अभी कम नहीं हुआ है ऐसे में विश्च की सबसे प्राचीन और विश्वसनीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के सहारे ही इस पर विजय प्राप्त की जा सकती है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में न्यूट्रास्यूटिकल्स और हर्बल अर्क के अलावा ऑर्गेनिक अर्क ने लोगों की जान बचाई है।

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उन्होंने कहा है लोगों को जरूरत है कि वह आयुर्वेद को जीवन शैली के रूप में अपनाएं। कोविड-19 के खिलाफ निवारक उपाय के रूप में आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाना समय की जरूरत है। पारंपरिक प्रथाएं प्रतिरक्षा, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार और संक्रमण के जोखिम को कम करने में बहुत उपयोगी हो सकती हैं। समय से ही इसे अपनाने की जरूरत है, ताकि कोरोना की तीसरी लहर से लड़ा जा सके।