
Maulana Abul Kalam Azad birthday : मक्का के मुस्लिम विद्वान और अरबी महिला के इस पुत्र ने किया था पाकिस्तान विभाजन का विरोध
Maulana Abul Kalam Azad birthday मौलाना शब्द एक सम्मानजनक अर्थ है 'हमारे गुरु' और उन्होंने आजाद को अपने उपनाम के रूप में अपनाया था। भारत में शिक्षा की नींव स्थापित करने में उनके योगदान को उनके जन्मदिन के रूप में पूरे भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। इसको लेकर एक वेबिनार का आयोजन शिक्षण संस्थान में किया गया। जिसमें शिक्षकों ने मौलान के बारे में अपने विचार रखे। इस दौरान राजेश भारती ने कहा कि आजाद मक्का में रहने वाले एक भारतीय मुस्लिम विद्वान और उनकी अरबी पत्नी के पुत्र थे। जब वह छोटे थे तब परिवार वापस कलकत्ता चला गया और उन्होंने मदरसे के बजाय अपने पिता और अन्य इस्लामी विद्वानों से घर पर पारंपरिक इस्लामी शिक्षा प्राप्त की। 1923 में, 35 वर्ष की आयु में, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने।
रखी थी जामिया मिलिया इस्लामिया की नींव
अक्टूबर 1920 में, आजाद को ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार की मदद लिए बिना यूपी के अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना के लिए फाउंडेशन कमेटी के सदस्य के रूप में चुना गया था। उन्होंने 1934 में विश्वविद्यालय के परिसर को अलीगढ़ से नई दिल्ली स्थानांतरित करने में सहायता की। शिक्षा जगत में उनका योगदान का पता इससे चलता है कि जमिया मिलिया इस्लामिया विशवविद्यालय के मुख्य परिसर में द्वार संख्या 7 का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
हिंदू—मुस्लिम एकता का किया समर्थन
आज़ाद ने प्रमुख रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता के कारणों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद का समर्थन किया। उन्होंने अल-हिलाल अखबार के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए भी काम किया । उन्होंने 1940 से 1945 तक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और जेल भी गए थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत और पाकिस्तान में ब्रिटिश भारत के विभाजन का कड़ा विरोध करते हुए एक ऐसे भारत की अथक वकालत की, जो हिंदू और मुस्लिम दोनों को गले लगाए। उन्होंने 1947 से अपनी मृत्यु तक जवाहरलाल नेहरू की भारत सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। उनकी आत्मकथा, इंडिया विन्स फ्रीडम, 1959 में मरणोपरांत प्रकाशित हुई थी। मौलाना आज़ाद को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'भारत रत्न' से वर्ष 1992 में सम्मानित किया गया था। उनके जन्मे पैदाइश पर, हमें उनके दिखाए गए रास्ते पर चलकर शिक्षा के साथ साथ हिन्दू - मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना होगा।
Published on:
22 Feb 2022 12:07 pm

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