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बैंडबाजा और आतिशबाजी वाली बारात में निकाह नहीं पढ़वाएंगे मौलाना, फैसला 1 जनवरी से लागू

निकाह में बैंडबाजा और आतिशबाजी होगी तो मौलाना उसका बहिष्कार करेंगे। बैंडबाजा-आतिशबाजी वाली बरात में निकाह भी नहीं पढ़वाएंगे। यह फैसला 1 जनवरी 2023 से पूरे प्रदेश भर में लागू होगा।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Dec 17, 2022

बैंडबाजा और आतिशबाजी वाली बारात में निकाह नहीं कराएंगे मौलाना, फैसला 1 जनवरी से लागू

राजस्थान में मुस्लिम महासभा की बैठक में हुआ फैसला

बैंडबाजा और आतिशबाजी वाली बरात में मौलाना एक जनवरी से निकाह नहीं पढ़ाएंगे। ध्वनि प्रदूषण और सड़कों पर लगने वाले जाम की बात कहते हुए मुस्लिम महासभा ने बड़ा फैसला किया है।


मुस्लिम महासभा के यूपी प्रभारी हाजी नाजिम ने जानकारी दी कि पिछले कई महीनों से राष्ट्रीय स्तर पर जिलों के मौलानाओं से इस बारे में बातचीत का दौर जारी है।


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राजस्थान में हुई महासभा में लिया फैसला
हाजी नाजिम ने कहा कि कुछ दिन पहले राजस्थान में मुस्लिम महासभा की बैठक हुई थी। जिसमें उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान खान की अध्यक्षता में देश भर के मौलाना मौजूद रहे।


इसमें निकाह के दौरान बैंडबाजे और आतिशबाजी पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि यूपी के सभी जिलों के मौलानाओं ने इस फैसले पर रजामंदी दे दी है।


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इस्लाम में बैंडबाजा और आतिशबाजी पर रोक
हाजी नाजिम ने कहा कि इस्लाम में बैंडबाजे और आतिशबाजी पर रोक है। शरीयत में इसका जिक्र है। इमाम मौलाना वजीर अहमद ने कहा कि शरीयत में इसे फिजूल खर्ची बताया है।


बैंडबाजा और आतिशबाजी से निकलने वाली तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण तो फैलता है साथ ही आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

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दूल्हा-दुल्हन के परिवार को देना होगा लिखित में
हाजी नाजिम का कहना है कि एक जनवरी से पूरे प्रदेश में यह फैसला लागू किया जाएगा। निकाह से पहले दूल्हा और दुल्हन के परिवार को लिखित में देना होगा कि वह बैंडबाजा और आतिशबाजी का प्रयोग नहीं करेंगे।

इसके बाद ही मौलाना निकाह पढ़ाने जाएंगे। अगर इसके बाद भी आतिशबाजी और बैंडबाजा बजाया जाता है तो मौलाना बिना निकाह पढ़वाए वापस लौट जाएंगे।