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Lockdown से उद्योगों को हुआ करोड़ों का नुकसान, सैलरी को लेकर किया बड़ा ऐलान

Highlighta 21 दिन के लॉकडाउन में 1 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान 10 हजार से अधिक इकाइयों में उत्पादन है ठप व्यापारियों और कारोबारियों के सामने बड़ी चुनौती  

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मेरठ

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sharad asthana

Apr 14, 2020

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मेरठ। 15 अप्रैल यानी बुधवार से लॉकडाउन—2 शुरू हो जाएगा। मंगलवार को प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया है। ऐसे में अब तक पहले ही बंदी की मार झेल रहे उद्योगों को और बड़ा झटका लगा है। हालांकि, करोड़ों का नुकसान झेल रहे उद्यमी इन कठिन परिस्थितियों में भी कर्मचारियों की सैलरी नहीं काटने की बात कर रहे हैं।

नहीं बज रहा बैंड—बाजा

एक अनुमान के मुताबिक, मेरठ में औद्योगिक इकाइयों को 21 दिन के लॉकडाउन में एक हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। 10 हजार से अधिक इकाइयों में उत्पादन ठप है। विषम परिस्थितियों में व्यापारियों व कारोबारियों को कर्मचारियों, कारीगरों व अन्य श्रमिकों को वेतन देना पड़ा। ऐसे में व्यापारियों और कारोबारियों के सामने बड़ी चुनौती है। चीन से रॉ मैटीरियल नहीं आने से स्थानीय स्तर पर विभिन्न उद्योग-धंधे प्रभावित हो रहे हैं। लॉकडाउन के चलते व्यापार-कोराबार पर असर पड़ा है। न तो बैंडबाजे की धुन पर देश थिरक पा रहा है और न ही मेरठ की कैंची की धार चल पा रही। स्पोर्ट्स गुड्स का कारोबार भी ठप है। खेल सामान का निर्यात नहीं हो पा रहा है।

स्पोटर्स इंडस्ट्रीज हुई धराशाई

सबसे अधिक नुकसान स्पो‌र्ट्स इंडस्ट्रीज को होगा। करीब 100 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट इस लॉकडाउन से प्रभावित हो चुका है। दत्ता स्पोर्टस के स्वामी दीपक दत्ता बताते हैं कि उद्योगों से जुड़े करीब एक लाख से अधिक मजदूर और कारीगर घर पर बैठे हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत ही ईएसआई में पंजीकृत हैं। बाकी के लिए प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना भी मुश्किल हैं। ऐसे में उद्योगपतियों ने अपनी लेबर को वेतन और हरसंभव मदद देने के लिए व्यवस्थाएं बनाई हुई हैं।

केमिकल इंडस्ट्रीज को काफी नुकसान

उद्योगपतियों के अनुसार, फूड और केमिकल इंडस्ट्रीज को इस लॉकडाउन के दौरान रॉ मैटेरियल का काफी नुकसान झेलना पडेगा। अधिकतर फूड और केमिकल इंडस्ट्रीज में लाखों रुपए के ऐसे केमिकल व पेस्ट रखे हैं जो 25 डिग्री से ऊपर तापमान में खराब हो जाएंगे। इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी। 21 दिन के लॉकडाउन में इस इंडस्ट्री को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।

मंद पड़ी कैंची की धार

कैंची इंडस्ट्रीज से जुडे़ करीब 80 हजार से अधिक कर्मचारियों पर खानपान का संकट तक मंडराने लगा है। 80 हजार में से मात्र 20 फीसदी ही सेलरी वाले हैं। बाकी रोजाना कमाने वाले मजदूर हैं। कैंची इंडस्ट्रीज को 21 दिन में करीब 45 करोड़ से अधिक नुकसान का अनुमान है। सैफी सीजर्स के तनवीर सैफी कहते हैं कि कोरोना ने कैंची उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित किया है। नुकसान के बावजूद वह कैंची उद्योग से जुड़े कामगारों की हरसंभव मदद करेंगे।

मेरठ की स्थिति
— 1 लाख 20 हजार से अधिक मजदूर और कारीगर घर पर बैठे हैं
— 45 प्रतिशत ही कर्मचारी ईएसआई में रजिस्टर्ड हैं
— 200 करोड़ रुपए के आर्थिक नुकसान की आशंका है मेरठ इंडस्ट्रीज को
— 300 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट लॉकडाउन से प्रभावित
— 45 करोड़ से अधिक नुकसान की आशंका है कैंची इंडस्ट्रीज को