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मेरठ की शाने पंजाब और अर्ली प्रभात आडू का विदेश तक बज रहा डंका

आडू की वैरायटी किसानों की बढ़ा रही आय। मेरठ में तैयार की जा रही वैराइटी विश्च में भी की जा रही पसंद। जून—जुलाई के आसपास बोई जाती है आडू की वैरायटी। प्रभात के छोटे से पौधे पर आने लगती है फसल।

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मेरठ

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Rahul Chauhan

May 16, 2021

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मेरठ। मेरठ में किठौर और शाहजहांपुर फल पट्टी प्रदेश की प्रमुख फल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। यहां पर समय-समय पर फलों (fruits) की ऐसी वैराइटी उत्पन्न की गई है जो देश ही नहीं विदेशों में भी अपना जलवा कायम करती रही हैं। मेरठ की इस फल पटटी में आम, अमरूद, केला, पपीता, अंगूर, आडू, लीची के अलावा खरबूजा की पैदावार भी प्रमुख तौर से की जाती है। इस समय मेरठ में आडू की वैरायटी शाने पंजाब और अर्ली प्रभात का डंका देश से विदेश तक बज रहा है। इन दोनों प्रजाति के पेड़ों पर आए आडू खाने में तो स्वादिष्ट हैं ही साथ ही ये किसानों को भी खूब मालामाल कर रहे हैं।

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फलीय पौधों का कारोबार करने वाले शाहनवाज कहते हैं कि आडू की ये वैरायटी जून-जुलाई में बोई जाती है। मेरठ और पश्चिमी उप्र के किसानों का रूझान अब फलों की खेती को ओर अधिक है। इससे जहां किसानों को आर्थिक लाभ अधिक होता है वहीं दूसरी ओर इसकी देखरेख में मेहनत और लागत और भी कम आती है। उन्होंने बताया कि मेरठ में अर्ली प्रभात की वैराइटी किसानों के बीच अधिक लोकप्रिय है। अर्ली प्रभात में 3 से 5 फीट का पौधा भी फसल देनी शुरू कर देता है। प्रभात प्रजाति के पौधे का आडू खाने में अत्यन्त मीठा और लजीज होता है।

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नेपाल, म्यामार, बांग्लादेश हो रहा सप्लाई

मेरठ से अर्ली प्रभात की वैरायटी विदेश तक सप्लाई हो रही है। विदेश में फलों की पौधों का निर्यात करने वाले व्यापारी मेरठ से अर्ली प्रभात की वैरायटी नेपाल,म्यामार और बांग्लादेश तक भेज रहे हैं। शाहनवाज बताते हैं कि उनको पिछले साल नेपाल से करीब 1 लाख आडू के पौधों का आर्डर मिला था। जिसको वे आधा ही पूरा कर पाए थे। उन्होंने बताया कि ये आडू की वैरायटी मेरठ में ही तैयार की गई है। इसलिए मेरठ से ही लोग इसकी पौध खरीदना अधिक पसंद करते हैं।