3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

INDvsBAN: अगर मैच में इस्तेमाल होती लाल गेंद तो मुसीबत में पड़ जाते बल्लेबाज, पहली बार होगा Pink Ball का प्रयोग

Highlights: -पहले डे-नाइट टेस्ट मैच (INDvsBan Day Night Test match) में पिंक बॉल का इस्तेमाल होने जा रहा है -International Test Match में Pink Ball का इस्तेमाल होगा (pink ball in india vs ban) -ये पिंक बॉल मेरठ की संसपैरेल्स ग्रीनलैंड्स (SG) कंपनी ने खास ऑर्डर पर तैयार की हैं

3 min read
Google source verification

मेरठ

image

Rahul Chauhan

Nov 21, 2019

photo_3.jpg

मेरठ। (pink ball in india vs ban) भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन में शुक्रवार से शुरू होने जा रहे पहले डे-नाइट टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल होने जा रहा है। इतना ही नहीं, यह पहली बार है जब भारत में टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल होगा। ये पिंक बॉल मेरठ की संसपैरेल्स ग्रीनलैंड्स (एसजी) कंपनी ने खास ऑर्डर पर तैयार की हैं। कंपनी ने बीसीसीआई को कंपनी ने सौ से अधिक पिंक बॉल मुहैया करा दी हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों से ये पिंक बॉल चर्चा का विषय बनी हुई है। आईए जानते हैं इन पिंक बॉल के बारे में कुछ खास बातें-

यह भी पढ़ें : Ghaziabad का Pacific Mall कर रहा था हवा को प्रदूषित, 26 लाख का जुर्माना लगा

तीन साल से चल रही थी पिंक बॉल पर रिसर्च

एसजी कंपनी के मार्केटिंग डायरेक्टर पारस आनंद का कहना है कि भारत और बांग्लोदश डे-नाइट टेस्ट मैच के लिए बीसीसीआई ने पिंक बॉल की डिमांड की थी। एक बॉल को तैयार करने में 6 से 8 दिन लग जाते हैं। वहीं एसजी के एक अधिकारी की मानें तो तीन साल में कई बार पिंक बॉल बनाने के लिए रिसर्च की गई। क्योंकि टेस्ट मैच में 90 ओवर तक एक ही बॉल चलती रखना बड़ी चुनौती रहती है। पिंक बॉल अन्य गेंदों के मुकाबले महंगी भी है। एक गेंद बनाने में छह हजार रुपये से अधिक का खर्च आ रहा है। 16 तरह के पिंक शेड्स में से एक को चुना गया है। कंपनी के अफसरों के मुताबिक पहली पिंक बॉल ऑस्ट्रेलिया की बॉल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी कूकाबूरा ने बनाई थी। दिलीप ट्रॉफी में भी पिंक बॉल का इस्तेमाल हो चुका है।

रेड बॉल की जगह इसलिए हो रहा पिंक बॉल का इस्तेमाल

बता दें कि टेस्ट क्रिकेट के दौरान खिलाड़ी सफेद जर्सी पहनते हैं। अभी तक टेस्ट मैच में रेड बॉल का इस्तेमाल होता आया है। ऐसा इसलिए है कि सफेद जर्सी के पहने खिलाड़ियों को बॉल आराम से दिख सके। हालांकि डे-नाइट टेस्ट मैच के दौरान रेड बॉल रात में कम दिखती, जिसके चलते पिंक बॉल को तैयार कराया गया। वहीं डे-नाइट टेस्ट में आरेंज बॉल के इस्तेमाल की शुरुआत की गई थी, लेकिन जानकारों की मानें तो येलो और ऑरेंज बॉल से मैच खेलने के दौरान उन्हें कवर करने वाले कैमरामैनों का कहना था कि गेंद को कैप्चर करना मुश्किल होता है। इसलिए पिंक कलर की गेंद पर सहमति जताई गई। पिंक बॉल पर काली सिलाई होती है।

यह भी पढ़ें: कश्मीर पुलिस ने नोएडा में की बड़ी छापेमारी, इस आरोप में तीन लोगों को किया गया गिरफ्तार

इस तरह बनती है क्रिकेट बॉल

-क्रिकेट बॉल की कीमत उसपर लगने वाले चमड़े की क्वॉलिटी पर ही निर्भर होती है।

-कारीगर सबसे पहले लकड़ी की गोली पर कॉर्क चढ़ाते हैं। कॉर्क चढ़ाने के बाद गेंद को सुखाया जाता है। उसके बाद उस पर चमड़ा चढ़ाकर धागे से सिलाई की जाती है।

-चमड़ा चढ़ाने, कॉर्क फिट करने और गेंद को शेप देने के साथ मानक के मुताबिक मजबूत धागे से सिलाई कर गेंद को फाइनल टच दिया जाता है।

-शाइनिंग और फिनिशिंग के लिए खास तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत क्वॉलिटी का खास ख्याल रखा जाता है।

-बॉल तैयार करने के दौरान कई बार उसकी गुणवत्ता परखने के लिए एक्सपर्ट के साथ रिसर्च की जाती है।

Story Loader