16 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

World Pneumonia Day 2022: प्रदूषण से बढ़ रहा निमोनिया,हर घंटे 14 बच्चों की जा रही जान

World Pneumonia Day 2022 प्रदूषण के चलते निमोनिया की गिरफ्त में नवजात बच्चे आ रहे हैं। यूनीसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्रदूषण के चलते निमोनिया की गिरफ्त में आने से हर घंटे 14 बच्चों की जान जा रही है। देश के बड़े महानगरों में प्रदूषण की स्थिति काफी खराब है। जिसके चलते बच्चों में निमोनिया के सबसे अधिक मामले भी इन्हीं बड़े शहरों में मिलते हैं। यूपी में भी बड़े शहरों में प्रदूषण से स्थिति काफी खराब है। यूपी में प्रदूषण के मामले में मेरठ मंडल नंबर वन है।

2 min read
Google source verification

मेरठ

image

Kamta Tripathi

Nov 12, 2022

World Pneumonia Day 2022: प्रदूषण से बढ़ रहा निमोनिया, हर घंटे 14 बच्चों की ले रहा जान

World Pneumonia Day 2022: प्रदूषण से बढ़ रहा निमोनिया, हर घंटे 14 बच्चों की ले रहा जान

World Pneumonia Day 2022 बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों में निमोनिया का कारण बन रहा है। इससे ठंड के मौसम में निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ती है। यूनीसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक उप्र में सबसे अधिक निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या मेरठ मंडल में है। 2018—19 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या का 20 फीसद मेरठ मंडल में था। इनमें भी मंडल के प्रमुख जिलों गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा में सबसे अधिक निमोनिया पीड़ित बच्चे पाए गए थे।

चिकित्सकों की माने तो निमोनिया से मौत के मामलों में करीब 50 फीसदी प्रदूषण से जुड़े होते हैं। फिलहाल मेरठ और गाजियाबाद में हर दिन बढ़ रहे प्रदूषण से हालात काफी खराब हो रहे हैं। ऐसे में बच्‍चों में न‍िमोनिया का खतरा भी बढ़ रहा है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में बच्‍चों में निमोनिया के मामले ज्‍यादा देखने को मिलते हैं। तापमान बदलते ही ये बच्‍चों पर तुरंत असर होता है। अभी जैसे-जैसे तापमान नीचे जाएगा, यह मामले और बढ़ते जाएंगे और इनकी संख्‍या बढ़ती है। हाल ही में रिपोर्ट भी आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2019 में नवजात बच्चों की मौत के मामले में 21 फीसदी मौतें वायु प्रदूषण की वजह से हुई हैं।


यह भी पढ़ें : Train Late: ट्रेनों की लेट-लतीफी से परेशान यात्रियों की स्टेशन पर कट रही रात


चिकित्सकों की माने तो सर्द‍ियों के मौसम में बच्‍चों में निमोनिया के मामले ज्‍यादा देखने को मिलते हैं। तापमान बदलने से बच्‍चों पर तुरंत असर होता है। अभी जैसे-जैसे पारा नीचे जाएगा, यह मामले और बढ़ते जाएंगे और इनकी संख्‍या बढ़ेगी। यूनिसेफ की 2019 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में भारत में पांच साल से कम उम्र के 1.27 लाख बच्‍चों की निमोनिया से मौत हुई। यानी हर घंटे करीब 14 बच्‍चों की जिंदग‍ियां निमोनिया का शिकार हुईं। उत्तर प्रदेश में यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 में दुन‍िया में निमोनिया से 5 साल से कम उम्र के 8.80 लाख बच्‍चों की मौत हुई थी। इसमें से करीब 2.9% बच्‍चों (26,200) की मौत यूपी में हुई थी।

यह भी पढ़ें : Gold Rate Today: सोने की कीमत में आज राहत,जानिए क्या है सराफा भाव

यह आंकड़ा भारत में किसी भी राज्‍य से अधिक था। यूपी के बाद बिहार में 23,200 बच्‍चों की मौत हुई थी। 17 मार्च 2020 को पेश आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में 2016-17 में 5 साल के कम उम्र के 118 बच्‍चों की मौत दर्ज की गई। 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 990 हो गया। 2018-19 में 568 बच्‍चों की मौत हुई। वहीं, 13 दिसंबर 2019 को लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक व‍ित्‍त वर्ष 2019-20 में अक्‍टूबर तक 206 बच्‍चों की मौत हुई।