
कवि सम्मेलन के दौरान सम्मानित किए गए नवोदित कवि
कवियों के बारे में कहते हैं कि जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि। ऐसे ही एक कवि इन दिनों पश्चिम यूपी के जिलों में नई कवि प्रतिभाओं को तलाश रहे हैं। वे गांवों में कवि सम्मलेन करा रहे हैं। प्रयागराज के रहने वाले अटल नारायण कवि तलाशने के अलावा लेखन क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं।
पत्रिका से की बातचीत
मेरठ पहुंचने पर पत्रिका से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि उनको वर्तमान में साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही संस्थान चेतना साहित्य परिषद का आजीवन सदस्य चुना गया। इसी के साथ ही उनको अटल नारायण भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ उत्तर प्रदेश से प्रकाशित की जाने वाली भारतेंदु कला पत्रिका के सम्पादक मंडल में सदस्य के रूप में भूमिका निभा रहे हैं। उनकी कविताएं युवाओं को लुभा रही हैं।
युवा कवियों को बताई समाज के प्रति कवि की जिम्मेदारी
उन्होंने युवा कवियों को बताया कि साहित्यकारों एवं कवियों के अंदर समाज में परिवर्तन लाने की क्षमता होती है। यदि ये चाह लें तो, विवेक और ज्ञान को भावना भरे शब्दों के बाणों में साधकर सीधा श्रोता के मन में उतार दें। लेकिन अजीब बात है कि समाज के लिए साहित्यकारों का इतना अमूल्य योगदान होने के बावजूद इनकी, आर्थिक स्थिति उतनी ठीक नहीं रहती। उन्होंने युवा कवियों को बताया कि इस दिशा में कार्य किया जाना ज़रूरी है।
अब तक 200 गांवों का भ्रमण
अटल नारायण द्वारा नए युवा कवियों को प्रोत्साहन और मंच देने का कार्य किया जा रहा है। अब तक वो करीब 200 से अधिक गांवों में नव कवि प्रतिभा खोज के अंतर्गत कवि गोष्ठियों का आयोजन कर चुके हैं।
'गुमनाम शहीदों की गाथा' पर काम
अटल द्वारा लिखी कविताओं का संग्रह पुस्तक अज्ञात अंतर्मन, के रूप में प्रकाशित हो चुकी है। वर्तमान में वो अगली पुस्तक 'गुमनाम शहीदो की गाथा' पर काम कर रहे हैं। नवोदित कवियों को अपने शिल्प, स्वयं और अपने जीवन की वास्तविकताओं के प्रति ईमानदार होना चाहिए। कविता के लिए अपने प्यार और जुनून को बनाए रखना चाहिए। आपका लेखन ऐसा हो जो देश और समाज के काम आए।
Published on:
12 Dec 2022 08:57 pm
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