
मेरठ। शनिवार को कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) मुजफ्फरनगर में बवाल के पीड़ितों से मिलने के बाद मेरठ पहुंची। वह मेरठ के बवाल में मारे गए पांच युवकों के परिवारों से मिलना चाहती थी। प्रियंका गांधी के मेरठ (Meerut) आने की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अफसर सकते में आ गए और उन्हें लिसाड़ी गेट और हापुड़ रोड में नहीं आने देने की तैयारी शुरू हो गई। बातचीत में प्रियंका गांधी ने भी कहा कि उन्हें रोकने का प्रयास किया गया था।
CAA के विरोध में 20 दिसंबर को मेरठ में हुए बवाल में मृतकों के परिजनों से मिलने के लिए प्रियंका गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) 24 दिसंबर को मेरठ आए थे, लेकिन प्रशासन और पुलिस अफसरों ने माहौल सामान्य नहीं होने और धारा 144 का नोटिस देते हुए उन्हें मेरठ के भीतर आने नहीं दिया था। दोनो नेता बाद में आने की बात कहकर दिल्ली लौट गए थे।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं को इसकी भनक लग गई और यह बात प्रियंका गांधी के साथ आए कांग्रेस नेता इमरान मसूद को बतायी गई। इसके बाद बवाल में मारे गए युवकों के परिजनों को शहर से बाहर भूड़बराल (परतापुर) स्थित ओम र्साइं धाम कालोनी में कांग्रेस नेता हर्ष ढाका और रोहित ढाका के निवास पर पहुंचने के लिए कहा गया। दो गाड़ियों में परिजन प्रियंका के आने से पहले वहां पहुंच गए थे। करीब 1.35 पर प्रियंका की गाड़ियों का काफिला इस कालोनी में पहुंचा, लेकिन गलती से यह काफिला कालोनी से पहले दूसरी रोड पर मुड़ गया। एनएच-58 से करीब 300 मीटर की दूरी पर जाने पर पता लगा कि यह गलत रास्ते पर आ गए।
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इसके बाद वहां कांग्रेसी नेता पहुंचे और उन्हें बवाल में मारे पांच युवकों के परिजनों से मिलवाया गया। यहां काफी आपाधापी रही। प्रियंका ने करीब 20-25 मिनट तक पीड़ित परिवारों से बातचीत की। इस दौरान मीडिया को भी बाहर ही रोक दिया गया था। प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर कानूनी और आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया है और उनके साथ कांग्रेस के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
Updated on:
05 Jan 2020 01:58 pm
Published on:
04 Jan 2020 04:23 pm
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