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शिक्षा के बिना पसमांदा मुसलमानों का मुख्य धारा में आना मुश्किल, धर्मगुरुओं ने उठाई आवाज

मुस्लिमों को शिक्षा देने पर इस समय जोर दिया जा रहा है। इसी तरह से पसमांदा मुसलमानों की शिक्षा के लिए सरकारी मुहिम चलाई जा रही है। मुस्लिमों को शिक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है। पसमांदा मुसलमानों के प्रति अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नजरिया भी बदल रहा है। हालांकि बोर्ड का दावा है कि यह सभी मुसलमानों (अशरफ और पसमांदा दोनों का गठन) की प्रतिनिधि सभा है और इस्लामी शरिया कानून के अनुसार उनके व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्यों की देखभाल करता है। इस बारे में मुस्लिम धर्मगुरुओं का नजरिया अलग है।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Jun 19, 2022

शिक्षा के बिना पसमांदा मुसलमानों का मुख्य धारा में आना मुश्किल, धर्मगुरुओं ने उठाई आवाज

शिक्षा के बिना पसमांदा मुसलमानों का मुख्य धारा में आना मुश्किल, धर्मगुरुओं ने उठाई आवाज

सदर बाजार स्थित मदरसा इमदादुल इस्लाम के प्रधानाचार्य मशूद्दूल रहमान शाही जमाली चतुर्वेदी ने अब पसमांदा मुस्लिमों की शिक्षा और उनको मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही हैं। मानवता के प्रचारक के तौर पर जाने वाले शाही जमाल चतुर्वेदी ने कहा कि आज शिक्षा हर धर्म की जरूरत है। मुस्लिम में कोई भी जाति हो लेकिन जब तक उनको शिक्षा की मुख्य धारा से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक उस जाति और धर्म का उत्थान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि पसमांदा मुस्लिमों को शिक्षा के लिए आगे आना होगा और शिक्षा ग्रहण कर अपनी उन्नति करनी होगी। शिक्षा से ही मुस्लिम समाज जाति, पंथ और नस्ल का सुधार होगा। आज शिक्षा मुस्लिमों के लिए बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी पसमांदा मुसलमानों की भाषा, सभ्यता और संस्कृति भारतीय भूमि के अन्य मूल निवासियों की तरह ही है। शिक्षा के माध्यम से ही नस्लीय जातीय, उच्च-निम्न, स्वदेशी-विदेशी,भेदभाव आदि को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज कि दुनिया ज्ञान—विज्ञान कि दुनिया हैं। अपने पैंगाम में उन्होंने कहा कि जो मुस्लमान शिक्षा से दूर रहे हैं,उनके लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। शिक्षा का पैंगाम क़ुरान की आयत से भी मिलता है।

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शिक्षा से समाज आगे बढेगा और भारत देश का नाम भी ऊंचा होगा। उन्होंने इंसानियत का संदेश देते हुए कहा कि मुस्लिमों को जागरूक करने के लिए शिक्षा का विशेष अभियान चलाया जाए। जिससे वो देश की तरक्की में हिस्सेदारी के साथ ही उसके भागीदार भी बनें। पसमांदा मुस्लिम देश की मुख्यधारा में तभी आ सकते हैं जब ये समाज शिक्षा के लिए आगे आए।