
मेरठ। अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने तो अपना फैसला सुना दिया, लेकिन अब फैसले को लेकर सभी दल, सामाजिक संगठन, संप्रदाय और संत समाज अपने-अपने तरीके से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर ट्रस्ट बनाकर उस ट्रस्ट के माध्यम से राम मंदिर का निर्माण विवादित भूमि पर शुरू कराया जाए।
साधू-संत और अखाड़ा परिषदों ने ट्रस्ट में अपनी-अपनी भागीदारी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अभी कुछ दिन पहले मेरठ आए रामालय ट्रस्ट के संत ने भी कहा था कि अयोध्या में रामालय ट्रस्ट के अलावा और किसी को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं है आैर यह भी कहा था कि सरकार को ट्रस्ट बनाने का भी अधिकार नहीं है।
मेरठ पहुंची महिला शंकराचार्य साध्वी त्रिकाल भवंता ने अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संत समाज को भी इस फैसले का स्वागत करना चाहिए। यह देश की 125 करोड़ जनता से जुड़ा हुआ मामला है। किसी एक अखाडा या पीठ का नहीं। इसलिए सभी को इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार का मंदिर निर्माण में समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जो ट्रस्ट बने उसमें पुरूष संत समाज की सहमति से किसी एक संत की भागीदारी हो और ऐसे ही महिला संत समाज से एक महिला संत की भागीदारी हो। इससे किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि फैसले से संत समाज को भी खुशी होनी चाहिए। रामलला का मंदिर बनाने में सभी को सामंजस्य बैठाना चाहिए। त्रिकाल भवंता ने कहा कि धर्म के लिए मातृशक्ति होती है। इसलिए ट्रस्ट में महिला संत की भी भागीदारी हो।
Published on:
20 Nov 2019 11:29 am
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