
मेरठ। कोरोना वायरस से बचने के लिए अब नमाज पढऩे के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है। इसके मुताबिक कहा गया है कि जुमे की नमाज घर पर ही अदा की जाए। शहर काजी जैनुसाजेद्दीन ने कहा कि जो बुजुर्ग हैं या बीमार हैं, ऐसे लोगों को मस्जिद में आने से बचना चाहिए। जुमे की नमाज को उन्होंने घर से ही अदा करने को कहा गया है। शहर काजी ने यह भी कहा है कि जो लोग मस्जिद आना ही चाहते हैं वह अपने घरों से ही वुजू करके आएं। मस्जिदों में वुजू न करें।
उन्होंने कहा कि नमाज में पढ़े जाने वाले नफिल और सुन्नत लोग घर से ही पढ़कर आएं, ताकि नमाजियों को मस्जिद में कम से कम समय रहना पड़े। मस्जिद में सिर्फ फर्ज नमाज अदा करें और बाकी नमाज भी घर जाकर ही पढ़ें। मस्जिद में लोगों से मेल-मिलाप के वक्त को कम से कम करें और हाथ मिलाने या गले मिलने से बचें। शहर काजी ने कहा कि जितना हो सके मस्जिद में भीड़भाड़ कम ही की जाए। ऐसा करके ही हम कोरोना वायरस से बच सकते हैं।
उन्होंने बताया कि दो एडवाइजरी जारी हुई हैं। पहली देवबंद से और दूसरी फिरंगी महल लखनऊ से, जिसमें इस बारे में नमाज पढऩे वालों और खासतौर पर मस्जिदों के इमाम को आश्वस्त करने की जरूरत है। मौजूदा हालात को देखते हुए बचाव के उपायों को अपना लेना जरूरी है, क्योंकि ऐसा न करने से दूसरे लोगों को खतरा हो सकता है और इस्लाम में किसी की जिंदगी को खतरे में डालना गलत कामों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग जिन्हें मस्जिद में जाने से रोका जा रहा है, उन्हें इस बात का यकीन रखना चाहिए कि उनकी मंशा दूसरों की हिफाजत करना है। वहीं यह भी कहा गया है कि मस्जिद प्रबंधन को चाहिए कि वह मस्जिद में सफाई के खास इंतजाम करें। शहर काजी ने कहा कि जिस तरह बीमारी से सावधान रहना जरूरी है, उसी तरह दूसरों में भी घबराहट या अफवाह फैलाने से बचें।
यह है वुज़ू
वुज़ू शरीर के भागों को धोने के लिए एक इस्लामी प्रक्रिया है, यह शुद्धि का एक धार्मिक तरीका है। वुज़ू में हाथ, मुंह, नाक, बाजुएं, सिर और पांव को पानी से धोना शामिल है और यह इस्लाम में धार्मिक अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण अंग है।
Published on:
19 Mar 2020 02:56 pm
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