भाजपा और आरएसएस के खिलाफ देश के शिया-सुन्नी हुए एक, 2019 में सबक सिखाने का किया ऐलान

भाजपा और आरएसएस के खिलाफ देश के शिया-सुन्नी हुए एक, 2019 में सबक सिखाने का किया ऐलान

Iftekhar Ahmed | Publish: Sep, 10 2018 08:54:35 PM (IST) Meerut, Uttar Pradesh, India

पहली बार मंच पर आए इन दो समुदाय की एकता भाजपा को पडे़गी भारी

केपी त्रिपाठी@patrika.com

मेरठ. लोकसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक दल देश की अलग-अलग जातियों और संप्रदायों को साधने में जुट गई है। लेकिन इस बीच भाजपा के लिए बुरी खबर है। भाजपा के खिलाफ पहली बार इत्तेहाद-ए-मिल्लत कमेटी के मंच पर शिया-और सुन्नी उलमा एक होते नजर आए। इस कांफ्रेंस में सैकड़ों लोग शामिल हुए। गौरतलब है कि शिया मुसलमान भाजपा का समर्थक माना जाता है। केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी इसी समुदाय से आते हैं। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी यह दावा कर चुके हैं कि शिया मुसलमान हमारे साथ है। लेकिन भाजपा के इन दावों के उलट

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मेरठ में शिया और सुन्नी दोनों समुदाय के लोग एक साथ बैठे दिखे। बैठक में मौजूद शिया-सुन्नी समुदाय के लोगों ने शिया और सुन्नी उलेमा की बातों को ध्यान से सुना और उस पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान इन उलेमा ने भाजपा की हुकूमतों की चालों से आम लोगों को अवगत कराया गया और बताया गया कि राजनीतिक पार्टियां मुसलमानों को आपस में लड़वाने का काम करती है, जिनसे बचना है और एक साथ रहकर नबी के नक्शे कदम पर चलना है। बैठक में भाजपा की नापाक चालों से दूर रहने और भाजपा सरकार को 2019 में नेस्तनाबूद करने का संकल्प भी लिया गया।

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दोनों मजहबों को लेकर है लंबी बहस
गौरतलब है कि शिया और सुन्नी के बीच मजहब को लेकर एक लंबी बहस है। शिया-सुन्नियों की किताबों से तर्क को नहीं मानते तो सुन्नी-शियाओं की किताबों के तर्क को नहीं मानते। तर्क और बहस अपनी जगह, लेकिन दोनों समुदाय के बीच कुछ गलतफहमियां भी रहती हैं और ये गलतफहमियां हर इलाके में नए-नए टाइप की मिलती है। एक गलतफहमी है कि शिया खाने में थूक कर खिलाते हैं। बस सुना है वाले तर्क पर ये गलतफहमी चली आ रही है। कट्टर सुन्नी शिया के घर खाने से परहेज करते हैं। इस अफवाह के बारे में फर्जी कहानियां गढ़ ली गई हैं, जबकि ये सच नहीं है। ऐसी ही और भी गलतफहमियां हैं, जो सिर्फ ‘सुना है’ वाले तर्क पर ही बनी हुई हैं। लेकिन वर्तमान में देश में बदले राजनैतिक हालात और भाजपा सरकार की सांप्रदायिकता वाली नीति ने दोनों समुदाय को एक मंच पर एकत्र करने का काम कर दिया। आज जिस तरह से दोनों समुदाय के उलेमा एक मंच पर दिखे वह वाकई बदले हालात में मुस्लिम राजनैति की कहानी बया कर रही है।

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भाजपा सरकार की सांप्रदायिक नीति और गलतफहमियां को दूर करने के लिए बैठक
बैठक में आए सुन्नी दानिश्वर कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि देश में इस समय हालात ठीक नहीं है। यह समय आपस में लड़ने का नहीं, देश को बचाने का है। ऐसे में सभी समुदाय को एक होकर अपनी हठधर्मिता को छोड़कर एक मंच पर आना चाहिए। आज आरएसएस ऐसी चालें चल रहा है कि देश की एकता-अखंडता खतरे में है। इन्हीं सब तर्क और गलतफहमियों को दूर करने के लिए ये बैठक आयोजित की गई थी। गौरतलब है कि पश्चिम उप्र में ऐसा पहली बार हुआ है, जब शिया और सुन्नी समुदाय के उलेमा एक मंच पर आए और विचारों को रखा। इससे पूर्व भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। समय-समय पर उलमा ने आपस में इत्तेहाद के बयान तो दिए, लेकिन एक मंच दोनों समुदाय के उलेमा और लोगों को लाया नहीं जा सका। हालांकि, कांफ्रेंस में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों समुदाय के उलमा ने एक साथ बैठकर उनका बहिष्कार किया भी और वसीम को आज का यजीद बता दिया।

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माइनरटी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले
माइनरटी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीएम मुस्तफा ने कहा कि शिया-सुन्नी का आपस में झगड़ा किस बात का। दोनों एक ही अल्लाह को मानते हैं, मुहम्मद साहब को अल्लाह का आखिरी पैगंबर मानते हैं। कुरान को अल्लाह की किताब मानते हैं। दीन भी दोनों का इस्लाम है तो फिर दिक्कत कहां हैं? क्यों शिया-सुन्नी में इतनी दूरियां हैं? क्यों नफरतों के बीज फूटता रहता हैं? दरअसल ये भाजपा हुकूमत की पॉलिसी है कि इन्हें आपस में लड़वाओं और कमजोर करो, क्योंकि अगर हम एक हो गए तो हुकूमतें हिल जाएंगी। किसी भी पार्टी का दौर रहा हो, सबने हमें लड़ाने का काम किया। इसके अलावा कारी शफीकुर्रहमान ने अपने संबोधन में भाजपा और आरएसएस के साथ ही हाल के दिनों में मीडिया पर भी निशाना साधा।

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