
मेरठ। 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ को स्मार्ट सिटी के लिए चयन किया है। मेरठ में विकास की सोच के साथ प्रधानमंत्री ने यह निर्णय लिया है, इसलिए अपने यहां के भाजपा उम्मीदवारों को जिताएं, ताकि जिस तरह हमने दीपावली पर पूरी अयोध्या नगरी को जगमग कर दिया था, उसी तरह आपके नगर भी एलर्इडी लाइट से जगमग हो सकें।' 18 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने निकाय चुनाव से पहले जनसभा की थी आैर मेरठ को स्मार्ट सिटी में शामिल करने की बात पर उन्होंने दावे के साथ ये लाइनें बोली थीं। अब मेरठ स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो गया है, तो सीएम के इस दावे के मायने बदल गए। तीसरी बार मेरठ शहर स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हुआ है। यह तब है जब जनपद में प्रदेश की तरह भाजपा का कब्जा है। इस कारण ही पीएम आैर सीएम मेरठ को स्मार्ट सिटी में शामिल होते देखना चाहते थे, लेकिन उनकी मुराद पूरा नहीं हुर्इ।
भाजपा के गढ़ में
मेरठ को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं किए जाने पर जोर का झटका इसलिए भी लगा है कि जनपद में भाजपा की सरकार काफी समय से है। प्रदेश में कोर्इ भी सरकार हो मेरठ शहर व देहात में भाजपा का झंडा हमेशा बुलंद रहा है। इस समय जनपद में की सात सीटों में से छह पर भाजपा विधायक हैं, सांसद भाजपा का आैर जिला पंचायत अध्यक्ष भी। नगर निगम में 90 में से 36 भाजपा के सभासद। इससे पहले तो मेयर भी भाजपा से था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ को अपने दिल के करीब बताते हैं आैर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मेरठ को विकसित होते देखना चाहते हैं। भाजपा के इतने शूरवीरों के बावजूद मेरठ स्मार्ट सिटी की दौड़ में तीसरी बार बाहर हुआ है।
इन्होंने एेसा कहा
बसपा मेयर सुनीता वर्मा ने कहा कि भाजपा ने लोगों से झूठे वादे करके उन्हें गुमराह किया है। यह भाजपा के जनप्रतिनिधियों की विफलता है। भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि वह स्मार्ट सिटी में मेरठ को शामिल नहीं किए जाने पर दुखी हैं, जिला प्रशासन ने अपना सही रोल नहीं निभाया। सपा शहर विधायक रफीक अंसारी ने कहा कि भाजपा जनप्रतिनिधि फेल हो गए हैं।
Updated on:
21 Jan 2018 12:51 am
Published on:
20 Jan 2018 09:15 pm
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