
मेरठ. पिछले दिनों मवाना तहसील के कई गांवों में सांपों के आतंक के चलते ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई थी। एक पखवाड़े पूर्व परीक्षितगढ के एक गांव में रात में सोते हुए दो बच्चों को सांप ने काट भी लिया था। जिससे दोनों की मृत्यु हो गई थी। उसके कुछ दिन बाद तक माहौल कुछ शांत रहा तो मूसलाधार बारिश में फिर से गांव की गलियों और छतों पर सांप दिखाई देने लगे।
इन गावों में सपेरे बजा रहे हैं बीन
जिले के तोफापुर, नगला गोसाई, चितवाना शेरपुर, नारंगपुर आदि गांवों में फिर से सपेरे बीन बजाकर सांप को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। हालात ये है कि शाम होते ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर रहा है। ग्रामीण रात में टार्च और डंडा लेकर पहरा दे रहे हैं। जमीन में जरा सी सरसराहट पर ग्रामीणों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। सापों को पकड़ने की कमान फिर से सपेरों ने संभाल ली है। अब तक तोफापुर में एक दर्जन से अधिक सांप पकड़े जा चुके हैं।
एक कमरे में सो रहा पूरा परिवार
दो दिन से हो रही भीषण बारिश के कारण गांव में भी हालात काफी खराब हो गए है। तोफापुर के श्याम गुर्जर का कहना है कि पिछले दो चार दिन से कुछ राहत मिली थी और सांपों का आतंक कम हुआ था। लेकिन जब से भीषण बरसात हुई हैं उसके बाद से गांव की गलियों और चकरोड पर कई बार जहरीले सांप दिखाई दे रहे है। सांपों के कारण गांव में बच्चों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। घेर और खेतों में भी इस कारण से नहीं जा रहे हैं। रात में ग्रामीण अपने-अपने मोहल्ले में हाथ में डंडा और टॉर्च के साथ गश्त कर रहे हैं। इसके साथ ही जगह-जगह पर कंडे की आग जला रहे हैं। जहां पर सांप दिखाई दे रहा है वहां पर आग से धुंआ किया जा रहा है।
बरसात के मौसम में सांपों का निकलना आम बात- वन अधिकारी
वहीं इस बारे में वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांपों का निकलना कोई नई बात नहीं है। इस मौसम में सांप निकलते ही हैं। खासकर जब उनके बिलों में पानी भर जाता है तो वे अपने भोजन की तलाश में बाहर निकल आते हैं। अभी उनके पास किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है।
BY: KP Tripathi
Published on:
13 Sep 2021, 12:39 PM IST
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