
मान्यता है कि मां विन्ध्यावासनी देवी की नवरात्र में पूजा करने से सभी मनोकामना की पूर्ति होती है और देवी की इस दौरान भक्तों पर विशेष कृपा रहती है।

विन्ध्य पर्वत पर स्थित मां विंध्यवासिनी , मां अष्टभुजा और मां काली त्रिकोण की संरचना करती है। धरती पर कोई ऐसा स्थल नहीं जहां मां तीन रूपों में त्रिकोण पर विराजमान हो।

माना जाता है कि इस नवरात्र में देवी की आराधना करने स्वर्ग लोक से देवता भी आते है। नौ दिनों तक देवी की आराधना करते है। आदिकाल से शक्ति साधना का केंद्र रहा विन्ध्याचल केवल सिद्ध स्थल ही नहीं बल्कि शक्ति पीठों में सर्वप्रमुख शक्ति पीठ है।

विंध्याचल में नवरात्र के दौरान मां विंध्यवासिनी की आरती का वेदों पुरानों में विशेष महत्व है, भक्त मां की आरती को अश्मेघ यज्ञ से ज्यादा पुण्यदायी मानते है, मां की चार रूपों में आरती होती है सुबह के समय बाल्यकाल की मोहक आरती जीवन के सभी रंगों से उत्साह भरी होती है |