
नरेन्द्र मोदी
मिर्जापुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उस परियोजना का उद्घाटन करने मिर्जापुर आ रहे हैं जिसके बारे में कहा जा रहा है कि जिस प्रधानमंत्री ने इस परियोजना की आधारशिला आदि कार्यक्रम किया वह दोबारा पीएम नहीं बन सका। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोन नदी पर बने बाण सागर परियोजना के बारे में ऐसी बातें तब शुरू हो गयी हैं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 जुलाई को मिर्जापुर से ही इसका लोकार्पण करेंगे। यह परियोजना अपने आप में इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तीन राज्यों मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश की लाखों हेक्टेयर कृषी भूमि की सिंचाई की जाएगी। आइये विस्तार से जानते हैं इस परियोजना के बारे में और यह भी कि आखिर क्यों इसके बारे में ये कहा जाता है कि जिसने इसकी शुरुआत की वह देाबारा पीएम नहीं बन सका।
क्या है बाण सागर परियोजना
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के सोन नदी पर बने बाण सागर नहर परियोजम से तीन राज्यों मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में लाखों हेक्टेयर जमीन की सिचाई कि जाएगी। इस महत्वकांक्षी परियोजना कि शुरुआत 1978 में की गयी थी। तीनों राज्यों में 10 अगस्त 1973 में समझौता हुआ। जिसे बाद में योजना आयोग ने 10 अगस्त 1978 को पत्र संख्या 11-2(28)/77-1&cad जारी कर परियोजना को मंजूरी दिया। इस नहर परियोजना से कुल 46,46 क्युसेक क्षमता की बाण सागर पोषक नहर निकाली गई जिससे मध्य प्रदेश से मिर्ज़ापुर के अदवा जलासय में पानी लाया जाएगा।
अदवा जलाशय में उपलब्ध पानी को सुखडा नहर द्वारा मिर्ज़ापुर के तहसील लालगंज के हालिया ब्लाक में पहुचाया जाएगा। अदवा जलाशय से निकलने वाली 25.26 किलोमीटर लंबी अदवा मेजा लिंक नहर से पानी इलाहाबाद जनपद के मेजा जलाशय में पानी पहुचाया जाएगा। मेजा जलाशय से पानी को बेलन नहर के माध्यम से इलाहाबाद के कोरांव, मेजा, एंव मांडा क्षेत्र में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मेजा जलाशय से जरगो जलाशय को जोड़ने वाली 71.13 किलोमीटर लंबी मेजा जरगो नहर का निर्माण कराया गया है। इसी नहर से निकलने वाली 3.557 किलोमीटर लंबी मेजा कोटा नहर से लालगंज के उपरौध और रजवाहा को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों के लिए अदवा जलासय और मेजा जलाशय से एक अक्टूबर से 28 मई के मध्य सिचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
परियोजना के फायदे
उत्तर प्रदेश को बाणसागर जलाशय से कुल 9630 लाख घन मीटर पानी मिलेगा जिससे इलाहाबाद के 74.823 हेक्टेयर औऱ मिर्ज़ापुर के 75.309 हेक्टेयर भूमि में सिचाई की जाएगी इससे कुल 150.132 हेक्टेयर कृषि भूमि कि सिचाई होगी। इससे दोनों जनपदों में एक लाख सत्तर हजार किसान लाभान्वित होंगे।लाभ कि बात करे तो इससे साल भर में 5.54 लाख टन अतिरिक्त उत्पाद होगा।
परियोजना कि शुरुआत
बाड़सागर नहर परियोजना कि शुरुआत 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई ने शिलान्यास कर किया था। परियोजना की शरुआत लागत -1989-1990 330.19 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। मगर देर होने के कारण इसका बजट बढ़ता गया। वर्ष 2003 में 955.06 व 2007-में 2058.01,व 2010 में 3148.91और 2017में बढ़ते-बढ़ते 3420.24 करोड़ हो गया। परियोजना को पूरा होने में दशकों का समय लग गया।
लगातार देर होने से जहां एक तरफ इसकी लागत बढ़ती जा रही थी तो दूसरी ओर पूरी परियोजना पर ही प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा था। 2014 में केंद्र में भाजपा कि सरकार बनने पर मोदी सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को उन 99 परियोजना में चिन्हित किया जो कई वर्षों से लंबित थी। इसे प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना से जोड़ कर लक्ष्य निर्धारित कर जल्द से जल्द पूरा कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया। अब यह परियोजना पूरी तरह से पूर्ण हो चुकी है इसे 15 जुलाई को खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकार्पण कर देश को समर्पित करेगे।
परियोजना के साथ मिथक
इस परियोजना के साथ एक मिथक यह भी है कि इसकी शुरुआत करने वाले को दोबारा प्रधानमंत्री बनने का मौका नहीं मिला। 1978 में मोरारजी देसाई ने इस परियोजना का शिलान्यास किया। एक साल बाद ही उनकी कुर्सी चली गई और वो दोबारा पीएम नहीं बन सके। यही नहीं पॉलिटिक्स में उनकी पकड़ भी कमजोर हो गई और आखिर में सन्यास भी ले लिया। मध्य प्रदेश में परियोजना पूरी होने के बाद वहां की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने इसका लोकार्पण 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कराया। उसके बाद वह भी पीएम नहीं बन सके। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका लोकार्पण करने जा रहे हैं। हालांकि पीएम नरेन्द्र मोदी ने पहले भी मिथक तोड़ने की हिम्मत दिखायी है और इस बार भी वह यही करेंगे।
By Suresh Singh
Published on:
11 Jul 2018 09:33 am
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