
2001 brahmos missile
26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होने के बाद भारत ने प्रत्येक क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि की जिसमें रक्षा से संबंधित टेक्नोलॉजी भी शामिल है। स्वतंत्र होने के बाद भारत ने स्वयं का रक्षा रिसर्च वाला प्रोग्राम डीआरडीओ चलाया जिसका आज दुनिया लोहा मानती है। इसके फलस्वरूप कई तरह की खतरनाक मिसाइलों का निर्माण किया गया जिनमें ब्रह्मोस का नाम सबसे पहले आता है। इस मिसाइल की ताकत के सामने आज दुश्मन देश पानी भरते नजर आते हैं।
परमाणु क्षमता से लैस इस मिसाइल की भारत लगातार रेंज बढ़ा रहा है और जल्द ही यह इंटरकॉन्टीनेंटल रेंज हासिल करने वाली है। 71 years 71 stories में हम आपको बता रहें इस मिसाइल जुड़ी प्रत्येक जानकारी जो हमें इस पर गर्व करने के लिए प्रेरित करती हैं।
क्या है ब्रह्मोस मिसाइल
ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक मिसाइल प्रणाली है जिसकी वजह से भारत मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बन चुका है। यह एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, पानी के जहाज, विमान अथवा जमीन से दागा जा सकता है।
इसको रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से बनाया है। इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। इस मिसाइल के समुद्री तथा थल संस्करणों का सफलतापूर्वक परीक्षण कर भारतीय सेना और नौसेना को सौंपा जा चुका है।
यह है ब्रह्मोस मिसाइल प्रोग्राम
रूस के साथ मिलकर बनाई गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस पर लगातार काम जारी है। सेना को सौंपे गए इसके बेड़े में 67 मिसाइलें, पांच मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर्स तथा कई उपकरणों के साथ दो मोबाइल कमांड पोस्ट भी हैं। फिलहाल इस मिसाइल की मारक रेंज 290 किलोमीटर की है जिसका सफल परीक्षण 2001 में किया जा चुका है।
यह अपने लक्ष्यों को सटीकता से भेदने में कामयाब रहती है जिसकी वजह से लक्ष्यों के अलावा अन्यों को काई नुकसान नहीं पहुंचता। आवाज की गति से 2.8 गुना तेजी से उड़ान भरने वाली ब्रह्मोस मिसाइल अपने साथ 300 किलोग्राम हथियार ले लाकर जमीनी लक्ष्य को 10 मीटर की ऊंचाई तक से नेस्तनांबूद कर सकती है।
ब्रह्मोस मिसाइल का भविष्य
ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता फिलहाल 290 किलोमीटर लेकिन इसकी गुणवत्ता और सटीकता को देखते हुए इसे बढ़ाने पर काम जारी है।
भारत का लक्ष्य अगले 10 साल में करीब 2000 ब्रह्मोस मिसाइलें बनाने का है जिनको रूस से लिए गए सुखोई लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा। जल्द ही ब्रह्मोस-2 नाम से हाइपर सोनिक मिसाइल भी बनाई जाएगी जो 7 मैक की गति से वार करने में सक्षम होगी। हालांकि अब भारत को इस मिसाइल की रेंज अपने दम पर ही बढ़ानी होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे अधिक दूरी की मिसाइल का विकास रूस के साथ मिलकर नहीं किया जा सकता सम्भव नहीं है। क्योंकि रूस अंतरराष्ट्रीय मिसाइल तकनीक नियंत्रण संधि (एमटीसीआर) का हस्ताक्षरकर्ता है। इसकी वजह से वह 300 किमी से अधिक की रेंज वाली मिसाइल के विकास में दूसरे देशों की सहायता नहीं कर सकता।
Published on:
14 Aug 2017 07:57 am
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