17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश में 75 फीसदी आबादी न्यू वल्र्ड सिंड्रोम से प्रभावित

देश में हर 100 में से 75 लोग न्यू वल्र्ड सिंड्रोम से प्रभावित है। यह बीमारी गलत जीवनशैली व आहार संबंधी आहाj की वजह से होता।

2 min read
Google source verification

image

Shiwani Singh

Aug 13, 2018

New World syndrome

देश में 75 फीसदी आबादी न्यू वल्र्ड सिंड्रोम से प्रभावित

नई दिल्ली। देश में बहुत बड़ी आबादी न्यू वल्र्ड सिंड्रोम से प्रभावित है। न्यू वल्र्ड सिंड्रोम कीटाणु या संक्रमण द्वारा होने वाली बीमारी नहीं बल्कि जीवनशैली व आहार संबंधी आदतों के कारण होने वाली बीमारियों का एक संयोजन है। न्यू वल्र्ड सिंड्रोम से प्रभावित लोग मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दिल संबंधी रोग आदि गैर-संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित होते हैं।

यह भी पढ़ें-एक राष्ट्र, एक चुनाव के समर्थन में उतरी भाजपा, विधि आयोग को लिखा पत्र

हैदराबाद के सनशाइन अस्पताल के बरिएट्रिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वेणुगोपाल पारीक ने कहा कि न्यू वल्र्ड सिंड्रोम पारंपरिक आहार और जीवनशैली में आए बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है। न्यू वल्र्ड सिंड्रोम के लिए पश्चिमी भोजन खासतौर पर जिम्मेदार है। ये सभी खाद्य पदार्थ वसा, नमक, चीनी, कार्बोहाइड्रेट और परिष्कृत स्टार्च मानव शरीर में जमा हो जाते हैं और मोटापे का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि मोटापे के कारण ही मधुमेह मेलिटस, उच्च रक्तचाप, कार्डियोवैस्कुलर रोग, स्तन कैंसर और डिस्प्लिडेमिया आदि बीमारियां होती हैं।

उन्होंने बताया कि करीब 70 फीसदी शहरी आबादी मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 20 फीसदी स्कूल जाने वाले बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं प्रतिस्पर्धा व काम का दबाव वाली नौकरियाों और आराम ने परंपरागत व्यवसायों व चलने (शारीरिक गतिविधि) की आदत को बदल दिया है। इसकी वजह से शारीरिक गतिविधि कम और मस्तिष्क संबंधी परिश्रम अधिक होता है, यह भी न्यू वल्र्ड सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण बन गया है।

एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि मोटापा ऐसी स्थिति है जहां पेट में अधिक वसा जमा हो जाती है। शरीर के बॉडी मास इंडेक्स के अनुसार, पुरुषों में 25 फीसदी वसा और महिलाओं में 30 फीसदी वसा का होना मोटापे की श्रेणी में आता है।शरीर का वजन सामान्य से अधिक होने पर मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।