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रिपोर्ट: 8.5 तीव्रता के भूकंप से हिल सकती है राजधानी, धराशायी हो जाएंगी गगनचुंबी इमारतें

बेंगलुरु स्थित जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर ऐडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के सिस्मोलॉजिस्ट की स्टडी ने यह दावा किया है कि राजधानी क्षेत्र में भूकंप के बड़े झटके लग सकते हैं।

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रिपोर्ट: 8.5 तीव्रता के भूकंप से हिल सकती है राजधानी, धराशायी हो जाएंगी गगनचुंबी इमारतें

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली पर भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। बेंगलुरु स्थित जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर ऐडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के सिस्मोलॉजिस्ट की स्टडी ने यह दावा किया है कि राजधानी क्षेत्र में भूकंप के बड़े झटके लग सकते हैं। दरअसल, स्डटी का नेतृत्व करने वाले सीपी राजेंद्रन ने कहा कि भूगर्भिक क्षेत्र में काफी खिंचाव/तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। राजेंद्रन ने कहा कि 1315 और 1440 के बीच आए भूकंप के बाद मध्य हिमालय का क्षेत्र काफी शांत रहा है, लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है।

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दिल्ली और आसपास का क्षेत्र काफी संवेदनशील

स्टडी में बताया गया है कि दिल्ली के लिए यह काफी खतरे वाली बात हो सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि भूकंप के लिहाज से दिल्ली और आसपास का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। एक्सपर्ट की मानें तो स्टडी में दशाई गई तीव्रता का भूकंप आया तो राजधानी में केवल 20 प्रतिशत इमारतें ही सुरक्षित बच पाएंगी। इस क्षेत्र के संदेनशील होने का बड़ा कारण यह है कि यह तीन फॉल्ट लाइनों- पर बसा हुआ है। इन फॉल्ट लाइनों में मथुरा, सोहना दिल्ली-मुरादाबाद हैं। इस पूरे जोन में गुड़गांव सबसे अधिक संवेदनशील शहर है। गुडगांव के आसपास 7 फॉल्ट लाइन हैं।

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राष्ट्रीय राजधानी को जोन-3 से जोन-4 में शिफ्ट

वहीं, जीआरआईएचएच काउंसिल के संस्थापक मानित रस्तोगी के अनुसार 2001 में गुजरात में आए भयानक भूकंप के बाद राष्ट्रीय राजधानी को जोन—3 से जोन—4 में शिफ्ट कर दिया गया। जीआरआईएचएच के अनुसार दिल्ली में अगर ऐसा भूकंप आया तो यहां केवल 10 प्रतिशत बिल्डिंग ही भूकंप को झटका झेल पाएंगी। हालांकि भूकंप के खतरे को भांपते हुए 2008 में राष्ट्रीय राजधानी की कुछ पुरानी बिल्डिंग्स को दुरुस्त करने का काम छेड़ा गया था। जबकि 2015 में नेपाल भूकंप के बाद दिल्ली सेक्रेटियेट, पीडब्ल्यूडी व दिल्ली पुलिस हैडक्वार्टर समेत लडलॉ कैसल स्कूल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, विकास भवन और डिविजनल कमिशनल की इमारतों को मजबूत करने का काम किया गया था।